हनुमा विहारी- आर.अश्विन का अड़ जाना, पंत का धमाका, सिराज पर नस्लीय टिप्पणी और स्टीव स्मिथ का शतक

भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट क्रिकेट

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    • Author, आदेश कुमार गुप्ता
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

क्या एक ही टेस्ट मैच में क्रिकेट के इतने रंग देखने को मिल सकते हैं? बैट और गेंद के ज़ोरदार संघर्ष के बीच क्या कुछ देखने को नहीं मिला.

मैच के दौरान अचानक कुछ दर्शकों का भारत के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज पर नस्लीय टिप्पणी करना, बीसीसीआई का आईसीसी से शिकायत करना, उसके बाद ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड का माफ़ी माँगना, विराट कोहली का भारत में रहते हुए नाराज़गी दिखाना, इन सबके बीच निश्चित सी हार को टालकर भारत का मैच ड्रॉ कराना, चेतेश्वर पुजारा का धीमी गति से खेलकर आलोचना झेलना और फिर दूसरी पारी में भी अंगद की तरह पांव जमाकर खेलकर विरोधियों को करारा जवाब देना, रवींद्र जडेजा का चोटिल होकर सिरीज़ से बाहर होना, ऋषभ पंत का ख़राब विकेटकीपिंग के बाद शानदार बल्लेबाज़ी करना, रोहित शर्मा की वापसी, स्मिथ का शतक और दोनों टीम के खिलाड़ियों का जमकर कैच छोड़ना- ये सिडनी में पाँच दिनों तक चले टेस्ट मैच की झांकी रही.

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेला गया तीसरा टेस्ट मैच बिना किसी नतीजे के समाप्त हुआ. ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने दूसरी पारी में जीत के लिए 407 रनों का लक्ष्य रखा था जिसके जवाब में भारत ने पाँच विकेट के नुक़सान पर 334 रन बनाए.

मैच के पाँचवें और अंतिम दिन भारत ने दो विकेट पर 98 रन से आगे खेलना शुरू किया. रवींद्र जडेजा पहले ही अंगूठे पर चोट खाए हुए थे तो ऋषभ पंत भी कलाई में चोट के दर्द से परेशान थे.

हनुमा विहारी अपने चयन को लेकर सवालों के घेरे में थे तो पहले चार दिन ऑस्ट्रेलिया के हावी रहने से बने दबाव से भारत के चाहने वालों को भी टीम से अधिक उम्मीद नहीं थी. इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाज़ों ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों का पूरे 131 ओवर सामना किया.

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टेस्ट क्रिकेट की अनिश्चितता

इसमें शुभमन गिल, रोहित शर्मा और ऋषभ पंत की तेज़ तर्रार पारी के अलावा चेतेश्वर पुजारा, हनुमा विहारी और आर अश्विन के असीम धैर्य ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

चेतेश्वर पुजारा ने 205 गेंद खेलकर 77 रन बनाए तो हनुमा विहारी ने मांसपेशियों में खिंचाव के बावजूद 161 गेंदों पर नाबाद 23 रन बनाए. आर अश्विन ने भी उनका भरपूर साथ देते हुए 128 गेंदों का सामना कर नाबाद 39 रन बनाए. इन दोनों बल्लेबाज़ों ने अपने शरीर पर भी तेज़ गेंदों को सहा.

इससे पहले कप्तान अजिंक्य रहाणे ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए ऋषभ पंत को हनुमा विहारी से पहले बल्लेबाज़ी करने भेजा जिन्होंने दो जीवनदान मिलने के बाद केवल 118 गेंदों पर 97 रन बनाकर एक बार तो भारतीय ख़ेमे में जीत की उम्मीद जगा दी थी.

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन ने ऋषभ पंत के दो और एक कैच हनुमा विहारी का छोड़ा. शायद यही टेस्ट क्रिकेट की अनिश्चितता और ख़ूबसूरती है कि सिडनी में आख़िरी समय तक अंतिम परिणाम पर सबकी नज़रें टिकी रही.

भारत के लिए अंत भला तो सब भला जैसी स्थिति रही. क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन को इस ड्रॉ टेस्ट मैच को भारत की नैतिक जीत भी मानते हैं.

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नस्लीय टिप्पणियों का विरोध

सिडनी ना जाने क्यों भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बेहतरीन क्रिकेट के बीच विवादों का केंद्र भी रहा है. मैच का रोमांच चौथे दिन तब फीका हो गया जब स्क्वायर लेग बाउंड्री के पास खड़े भारत के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज ने दर्शकों द्वारा अपशब्द कहे जाने की बात की.

इसके बाद रविवार को सुरक्षाकर्मी अपशब्द कहने वाले व्यक्तियों की तलाश में जुटे और दर्शकों के एक समूह को स्टैंड से जाने को कहा गया. ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड ने बाद में माफ़ी भी माँगी. मामला इतना गर्माया कि सबको मंकी गेट कांड की याद आ गई क्योंकि बात आईसीसी तक भी पहुँची.

इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन मानते हैं कि सिराज के साथ यह सही नहीं हुआ. खेल में ऐसी बातें नहीं आनी चाहिए लेकिन विश्व में ऐसी घटनाएँ हो रही है. अमरीका में कुछ फ़ुटबॉल मैचों में भी ऐसा देखने को मिला. मेहमान टीम के ख़िलाफ़ अगर ऐसा होता है तो उससे सख़्ती से निपटना चाहिए. अगर सिर्फ़ चेतावनी से काम चल जाता तो ऐसा नहीं होता. ऐसा नहीं है कि भारत में ऐसा नहीं होता.

अयाज़ मेमन याद करते हैं कि साल 2008 में मुंबई के बेब्रोन स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू सायमंडस को भी अपशब्दों का सामना करना पड़ा था. बाद में मुंबई पुलिस ने कुछ लोगों के ख़िलाफ़ कारवाई भी की. भविष्य में ऐसा ना हो तो बेहतर हो.

इस मामले में पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा की टिप्पणी थी कि 21वीं सदी में इस तरह की बातों का क्या काम. वैसे आर अश्विन भी इस बात से आश्चर्यचकित थे कि सुरक्षाकर्मियों ने पहली बार में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. ग़नीमत है मामला जल्दी ही नियंत्रण में आ गया और इसके बाद बरसों तक याद रखे जाने वाली क्रिकेट देखने को मिली जिसकी बुनियाद टीम में वापसी करने वाले रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने रखी.

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विवादों के बीच रोहित शर्मा ने की वापसी

कल्पना कीजिए कि कैसा हुआ होगा जब एक खिलाड़ी विदेशी दौरे पर इसलिए नहीं जा रहा है क्योंकि वह पूरी तरह फ़िट नहीं है, लेकिन आईपीएल के मुक़ाबले खेल रहा है वह भी प्ले ऑफ़ और फ़ाइनल जैसा.

फ़िर एनसीए में ट्रेनिंग और बाद में सिरीज़ के 1-1 से बराबरी पर आने के बाद सलामी बल्लेबाज़ की भूमिका निभाना. जो भी हो, यह कहानी है रोहित शर्मा की जिन्होंने सिडनी में शानदार प्रदर्शन किया ख़ासकर दूसरी पारी में अर्धशतक बनाकर.

अयाज़ मेमन ने मनाया, "विवाद के बीच अपना स्वभाविक खेल खेलना आसान नहीं होता. रोहित शर्मा के फ़ुटवर्क पर सबकी नज़र थी, वह चोट से उभरने के बाद खेल रहे थे. विदेशी ज़मीन पर टेस्ट क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड अच्छा नहीं था, लेकिन वह बेहतरीन अंदाज़ में खेले. उन्होंने दिलकश शॉट्स लगाए."

दूसरे छोर पर शुभमन गिल ने भी उनका अच्छा साथ दिया. उन्होंने पहली पारी में अर्धशतक भी जमाया. कुल मिलाकर रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने सलामी जोड़ी की समस्या को हल किया है.

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आह पुजारा वाह पुजारा

अब जबकि भारत सिडनी में तीसरे टेस्ट मैच को ड्रॉ खेलकर शान से अपने कंधे उठाए खड़ा है तो उसका पूरा श्रेय नज़र गड़ाकर गेंद को झुककर खेलने की कला में माहिर चेतेश्वर पुजारा को भी ही नहीं चेतेश्वर पुजारा को ही जाता है.

पहली पारी में 176 गेंदों पर पचास रन बनाकर सबकी आंखों की किरकिरी बने पुजारा को बाद में यह कहकर अपना बचाव करना पड़ा कि उन्होंने जो किया वह उससे बेहतर नहीं कर सकते थे. उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की शानदार गेंदबाज़ी के कारण उन्हें अपने टेस्ट करियर का सबसे धीमा अर्धशतक बनाने पर मजबूर होना पड़ा.

उनकी बल्लेबाज़ी देखकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर ने भी कहा कि पुजारा शॉट खेलने के लिए बिलकुल डरे हुए हैं.

वह गेंदबाज़ों पर हावी नहीं दिखे, लेकिन उन्हीं पुजारा के धैर्य की आज चारों तरफ़ जमकर तारीफ़ हो रही है. पुजारा ने दूसरी पारी में 205 गेंदों पर 77 रन बनाकर हैज़लवुड की गेंद पर बोल्ड होने से पहले ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों का तमाम जोश ठंडा कर दिया.

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एक तरह से उन्होंने मिचेल स्टार्क, हेज़लवुड, पैट कमिंस और नाथन लियन का जमकर सामना कर दिखा दिया कि विकेट पर टिकना मुश्किल नहीं है बस जिगर और संयम चाहिए. बाद में उन्हीं के नक़्शेक़दम पर हनुमा विहारी और आर अश्विन भी चले और भारत हार के मुंह से निकल गया.

पुजारा ने इस दौरान अपने टेस्ट करियर के छह हज़ार रन भी पूरे किए.

अपने दोनों घुटनों का ऑपरेशन करा चुके पुजारा ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के सामने घुटने नहीं टेके और शायद यह उनके टेस्ट करियर का सबसे बेहतरीन मैच भी माना जाए हॉलाकि पिछले दौरे में उन्होंने तीन शतक सहित पाँच सौ से अधिक रन बनाए थे.

अयाज़ मेमन पुजारा को लेकर कहते हैं कि पिछले पाँच छह साल में भारत को टेस्ट क्रिकेट में जो कामयाबी मिली है उसके हक़दार पुजारा भी हैं. पुजारा जमकर और एक छोर सँभालकर खेलते हैं जिससे दूसरे बल्लेबाज़ों को अपने स्ट्रोक खेलने में आसानी होती है. अयाज़ मेमन की यह बात तो सिडनी में भी लागू होती दिखी जब पुजारा और पंत के बीच चौथे विकेट के लिये 148 रन की साझेदारी हुई.

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जगह बचाने उतरे पंत ने जीत की उम्मीद जगाई

सिडनी टेस्ट मैच और किसी के लिए चाहे जैसा भी रहा हो ऋषभ पंत के टेस्ट क्रिकेट के लिए जीवनदायक बन गया. ऋषभ पंत ने विकेटकीपर के तौर पर जिस तरह कैच छोड़े उसके बाद तो उनके प्रशंसक तक त्राहि माम कह उठे.

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पेंटिंग जो कि आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के बल्लेबाज़ी कोच भी हैं, जिसके लिए ऋषभ पंत खेलते हैं, ने कहा कि इस भारतीय युवा ने अपने पदार्पण के बाद किसी अन्य विकेटकीपर से ज़्यादा कैच छोड़े है.

पंत ने कलाई पर चोट के बावजूद नम्बर पाँच पर खेलते हुए 118 गेंदों का सामना करते हुए बारह चौके और तीन छक्के की मदद से 97 रन बनाए और केवल तीन रन से ऑस्ट्रेलिया में अपने दूसरे शतक से चूक गए.

अब बल्लेबाज़ी में उनके कामयाब होने से इस चर्चा ने तूल पकड़ लिया है कि अब उन्हें बतौर बल्लेबाज़ टीम में शामिल किया जाए ना कि विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर. ऋषभ पंत ने पुजारा के साथ मिलकर 148 रन की साझेदारी की.

जब तक पंत विकेट पर थे तब तक ऑस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन की साँस गले में अटकी थी क्योंकि वह दो बार पंत का कैच छोड़ चुके थे. वैसे पंत को अभी भी अपने विकेट की क़ीमत जानने और समझने की ज़रूरत है क्योंकि अगर वह थोड़ी देर और टिक जाते तो शायद भारत जीत के लिए भी खेल सकता था.

ऐसे में जबकि केएल राहुल भी चोटिल होकर भारत लौट चुके हैं, हनुमा विहारी की मांसपेशियों में खिंचाव है, जडेजा के अंगूठे में चोट है तो पंत का बल्लेबाज़ी में चलना भारत की चिंता को कम करेगा.

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आर अश्विन भी चट्टान की तरह टिके

अभी तक पूरी सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज़ स्टीव स्मिथ के लिए सिरदर्द बने आर अश्विन सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के लिए भी चट्टान की तरह साबित हुए.

उन्होंने तब मोर्चा सँभाला जब भारत के पाँच विकेट 272 रन पर गिर चुके थे और तब तक 88.2 ओवर हो चुके थे और शायद ऑस्ट्रेलिया को जीत की ख़ुशबू भी आने लगी थी, लेकिन अश्विन कुछ और ही इरादे के साथ मैदान पर उतरे.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बतौर ओपनर खेलने का अनुभव काम आया और उन्होंने 161 गेंदों पर नाबाद 23 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया के मैच जीतने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. हॉलाकि उन्हें विकेटकीपर कप्तान टिम पेन ने जीवनदान भी दिया लेकिन क्रिकेट में यह सब तो होता रहता है.

उन्होंने हनुमा विहारी के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया के तेज़ और स्पिन अटैक का बख़ूबी सामना किया.

अयाज़ मेमन मानते हैं कि एक ऑफ़ स्पिनर होने के कारण अश्विन ने नाथन लियन के दिमाग़ को सही पढ़ा और हावी होने नहीं दिया. दूसरी तरफ़, हनुमा विहारी ने तेज़ गेंदबाज़ों को जिस अंदाज़ में खेला उसे देखकर कुछ हद तक राहुल द्रविड़ और पुजारा की याद आई.

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रक्षात्मक रूख़ अपनाते हुए मैच बचाने में आर अश्विन और हनुमा विहारी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इन दोनों बल्लेबाज़ों ने मिलकर लगभग 43 ओवर खेले और कई बार उठती हुई गेंदों को अपने शरीर पर भी झेला.

अब जबकि दोनों टीमें चार टेस्ट मैच की सिरीज़ में 1-1 की बराबरी पर हैं और चौथा और आख़िरी टेस्ट मैच केवल तीन दिन बाद ही ब्रिस्बेन में खेला जाएगा उसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि सिडनी की यादें ऑस्ट्रेलिया को बहुत परेशान करेगी कि वह सिडनी में जीत नहीं सके.

स्मिथ का फ़ॉर्म में आना कांटा बदल सकता है जबकि भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन किया है. अगर यह भारतीय टीम ब्रिस्बेन ने जीते भी नहीं लेकिन ड्रॉ भी खेल ले तो बॉर्डर -गावस्कर ट्रॉफ़ी भारत के पास ही रहेगी जो बहुत बड़ी बात होगी.

अब देखना यह भी दिलचस्प होगा कि ब्रिस्बेन में भारत किस बल्लेबाज़ी संयोजन के साथ उतरता है.

फ़िलहाल तो भारतीय टीम अपने चोटिल खिलाड़ियों के दर्द की कसक को भूलकर बेहद मुश्किल परिस्थितियों में ड्रॉ कराए गए मैच की मनोवैज्ञानिक ख़ुशी के जश्न में है जिसकी वह हक़दार भी है.

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