आईपीएल-12: चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच में धोनी अंपायर से उलझे

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
आईपीएल के इतिहास में वैसे तो ना जाने कितने क़िस्से हुए हैं. जिन पर एक पूरी किताब लिखी जा सकती है लेकिन बीते गुरुवार को तो जयपुर में मेज़बान राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेले गए मुक़ाबले में आख़िरी ओवर में जो हुआ, वैसा किसी ने इससे पहले कभी नहीं देखा.
इस मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने राजस्थान रॉयल्स को चार विकेट से हराया.
चेन्नई ने जीत के लिए 152 रनों का लक्ष्य कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के 58 और अंबाती रायडू के 57 रनों की मदद से आख़िरी गेंद पर छह विकेट खोकर हासिल किया.
आख़िरी गेंद पर चेन्नई को जीत के लिए चार रनों की ज़रूरत थी लेकिन सेंटनर ने बेन स्टोक्स की गेंद पर छक्के से मैच जिताया.
इससे पहले राजस्थान ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए बेन स्टोक्स के 28 और जोस बटलर के 23 रनों के सहारे निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 151 रन बनाए.
अब हार जीत तो मैच में चलती रहती है लेकिन असली कहानी तो आख़िरी ओवर की है जिसमें चेन्नई को जीत के लिए 18 रन की ज़रूरत थी.
19 ओवर के बाद चेन्नई का स्कोर पांच विकेट खोकर 134 रन था. क्रीज़ पर रविंद्र जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी थे.
दर्शकों के भारी शोर के बीच राजस्थान के कप्तान अंजिक्य रहाणे ने गेंद तेज़ गेंदबाज़ बेन स्टोक्स को थमाई.

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पिच पर धड़ाम हुए जडेजा
लम्बे रनअप के बाद स्टोक्स के हाथ से निकली पहली गेंद ऑफ स्टंप के बाहर फुलर लैंग्थ की थी.
इसे जडेजा ने भरपूर बैक लिफ्ट के साथ किसी तरह गेंद की पिच पर पहुंचते हुए स्टोक्स के सिर के ऊपर से स्ट्रेट छक्के के लिए बाउंड्री लाइन के बाहर भेज दिया.
छक्का लगाने के दौरान जडेजा का संतुलन बिगड़ा और वह पिच पर गिर गए.
दूसरी तरफ़ हैरान-परेशान स्टोक्स भी पिच पर गिरकर आंखे फाड़े गेंद को लहराते हुए छक्के के रूप में देखते रहे.
बेन स्टोक्स की दूसरी गेंद पर जडेजा एक रन लेने मे कामयाब रहे. लेकिन यह नो बॉल साबित हुई.
उसके बाद अगली गेंद पर स्ट्राइक के साथ धोनी ने फ्ऱी हिट पर दो रन बनाए.
तीसरी गेंद पर बेन स्टोक्स ने वह कर दिखाया जिसकी तलाश राजस्थान को थी. बेन स्टोक्स की बेहद शानदार यॉर्कर ने धोनी का मिडिल स्टंप उड़ा दिया.

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धोनी 43 गेंदों पर दो चौके और तीन छक्कों की मदद से 58 रन बनाकर चेन्नई के डगआउट में पहुंचे.
अब जयपुर में राजस्थान के समर्थकों में जीत की खुशबू आने लगी लेकिन कौन जानता था कि आईपीएल का सबसे बड़ा ड्रामा अभी बाकी है.
चौथी गेंद पर नए बल्लेबाज़ मिचेल सैंटनर ने हिम्मत दिखाते हुए दो रन बटोरे.
लेकिन इसके बाद मैदान में अंपायर और धोनी के बीच बहस का मंज़र दिखाई दिया. दरअसल यह गेंद सेंटनर की कमर तक की ऊंचाई तक की थी.
अंपायर ने पहले तो इसे नो बॉल कर दिया लेकिन बाद में अपना निर्णय वापस भी ले लिया.

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मैदान में अंपायर के पास आए धोनी
इस निर्णय से चेन्नई के डगआउट में खड़े महेंद्र सिंह धोनी फ़ौरन मैदान में अंपायर के पास पहुंच गए.
कैप्टन कूल कहे जाने वाले धोनी का यह रूप देखकर क्रिकेट प्रेमी हैरान रह गए. कमेंट्री कर रहे खिलाड़ियों के मुंह से भी निकला-यह अविश्वसनीय है.
ख़ैर लम्बी जद्दोजहद के बाद भी अंपायर का निर्णय नहीं बदला. हारकर निराश कदमों से धोनी ने मैदान से बाहर की राह ली.

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अब आख़िरी दो गेंदों पर चेन्नई और जीत के बीच छह रन का अंतर था.
पांचवीं गेंद पर सैंटनर बल्ला चलाने के लिए तैयार थे लेकिन यह क्या.
बेन स्टोक्स ने ऑफ स्टंप के बाहर इतनी वाइड गेंद की कि अगर सेंटनर लेटकर भी शॉट खेलना चाहते तो ना खेल पाते.
एक और अतिरिक्त रन और अतिरिक्त गेंद ने चेन्नई की बंद क़िस्मत का जैसे ताला खोल दिया और राजस्थान को जीती हुई बाज़ी के बदले हार के मुंह में धकेल दिया. स्टेडियम में बेन स्टोक्स की इस ग़लती से सन्नाटा छा गया.
आख़िरी गेंद पर जीत के लिए चार रनों की ज़रूरत थी लेकिन सेंटनर ने छक्का उड़ाकर चेन्नई को जीत दिला दी. सेंटनर 10 और जडेजा नौ रन बनाकर नाबाद रहे.
इस जीत के साथ ही चेन्नई के खिलाड़ी मैदान में सेंटनर और जडेजा को कंधों पर उठाने के लिए पहुंच गए. दूसरी तरफ़ राजस्थान अपनी ही गुलाबी नगरी जयपुर में हार के बाद बेंरग हो गया.

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अब इस बात पर काफ़ी बहस हो सकती है कि क्या धोनी अपना आपा खो रहे हैं और उनकी शालीनता उनसे दूर हो रही है.
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली मानते हैं कि उन्हें धोनी से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह मैदान में आ जाएंगे और खेल रोक देंगे.
मैदान में जो भी निर्णय हुआ वह अंपायर का फ़ैसला था. स्कवैर लैग अंपायर को लगा कि स्टोक्स की गेंद कमर के नीचे थी, वैसे भी सेंटनर में गेंद को ठीक सामने खेला.
यहां ऐसा लगता है कि धोनी अपना संतुलन खो बैठे. इसकी वजह यह भी हो सकती है कि धोनी थक गए थे, उनसे शॉट ठीक से नहीं खेले जा रहे थे. साफ़ नज़र आ रहा था कि फिटनेस की भी समस्या है.
विजय लोकपल्ली आगे कहते हैं कि मैदान पर आकर उन्होंने अच्छा उदाहरण नहीं दिया.
इसके बावजूद धोनी ने दिखा दिया कि मैच जिताने और लगभग हारे हुए मैच को जीत तक पहुंचाने में उनका आज भी कोई सानी नहीं है.
इस जीत के साथ ही चेन्नई सात में से छह जीत और एक हार और 12 अंकों के साथ अंक तालिका में पहले स्थान पर है.
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