IPL 2019: अब केकेआर से भी हारी आरसीबी, जानें पांच कारण

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
सोचिए कि चमत्कार, अविश्सनीय और करिश्मा जैसे शब्द अपने मायने खो दें और समर्थकों से भरा स्टेडियम किसी खिलाड़ी की एक पारी से निशब्द हो जाए.
शुक्रवार को ऐसा ही हुआ जब बैंगलोर में कोलकाता के आंद्रे रसेल के नाम की ऐसी सुनामी आई जिसने विराट कोहली की पूरी टीम को हिला कर रख दिया.
कोलकाता ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को पांच विकेट से हरा दिया.
उसके सामने जीत के लिए 206 रनों का लक्ष्य था जो उसने आंद्रे रसेल के केवल 13 गेंदों पर एक चौके और सात छक्कों की मदद से बनाए गए नाबाद 48 रनों की मदद से 19.1 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.
रसेल के बल्ले से निकली चौकों-छक्कों की बौछार ने स्टेडियम में मौजूद मेज़बान आरसीबी के समर्थन में उठ रहे शोर को समाप्त कर दिया. हांलाकि स्टेडियम में मौजूद दर्शक ख़ुशनसीब रहे जिन्हें ऐसी चमत्कारी पारी देखने को मिली.
जब रसेल का बल्ला बैंगलोर के गेंदबाज़ो की हर गेंद को गाजर-मूली की तरह काट रहा था तब सभी दांतों तले अंगुली दबाए हुए थे.

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ऐसा नहीं है कि रसेल ने सात छक्के तुक्के में लगाए. उनके ताक़तवर शॉट वहीं गए, जहां रसेल खेलना चाह रहे थे.
उनके शिकार बने टिम साउदी. टिम साउदी का ओवर, जो पारी का 19वां ओवर था, उसमें उन्होंने चार छक्के और एक चौका लगाया. साउदी ने इस ओवर में 29 रन दिए.
इससे पहले स्टोइनिस द्वारा फेंके गए 18वें ओवर में भी 23 रन बने. इसमें भी रसेल ने दो छक्के उड़ाए.
इसके अलावा पारी के 16वें ओवर में भी 13 रन बने. यह ओवर पवन नेगी ने किया था.
ये वे तीन ओवर थे जिन्होंने बैंगलोर के मुंह से लगभग निश्चिर नज़र आ रही जीत छीन ली.
ज़रा सोचिए अगर यह मैच ईडन गार्डंस में हो रहा होता तो क्या कोलकाता सारी रात सो पाता? शायद नहीं. रसेल की इस पारी का जश्न सुबह तक चलता.
क्रिस लिन और नीतीश राणा भी छाए
रसेल के अलावा क्रिस लिन ने 43 और नीतीश राणा ने 37 रन बनाए.

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मैच के बाद हार से निराश कप्तान विराट कोहली ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि अंतिम ओवर में जैसी गेंदबाज़ी होनी चाहिए, वैसी चतुराई उनके गेंदबाज़ों में नहीं है.
दूसरी तरफ रसेल ने कहा कि ऐसे मैच में केवल एक ओवर मैच का नक्शा बदल देता है. उन्होंने यह भी कहा कि धुंआधार बल्लेबाज़ी करते समय गेंद पर आंख और हाथ का सांमजस्य सही होना चाहिए.
इससे पहले बैंगलोर ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट खोकर 205 रन बनाए.
कप्तान विराट कोहली ने 84 और एबी डिविलियर्स ने 63 रन बनाए. फिर ऐसा क्या हुआ जो बैंगलोर को ले डूबा और वह भी लगातार पांचवे मैच में?

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लगातार पांच हार के पांच कारण
ऐसे पांच कारण जिन्होंने कोहली के विराट रूप को बौना बना दिया और 360 डिग्री पर खेलने की क्षमता रखने वाले एबी डिविलियर्स के होते हुए भी टीम ख़ुद 360 डिग्री पर घूम रही है.
1. बल्लेबाज़ी में दम नहीं
कहने को निर्धारित 20 ओवरों में तीन विकेट पर 205 रन का स्कोर कम नहीं कहा जा सकता लेकिन जब पहले विकेट के लिए विराट कोहली और पार्थिव पटेल के बीच तेज़ी से 64 रन बने तो उम्मीद थी कि स्कोर 230 या उससे भी अधिक बन सकता है.
लेकिन विराट कोहली 49 गेंदों पर 84 और डिविलियर्स 32 गेंदों पर 63 रन बनाकर आउट हुए तो यह लक्ष्य मुश्किल हो गया. इसके अलावा कोहली और डिविलियर्स के अलावा केवल पार्थिव पटेल ही थोड़ा-बहुत इस बार चल पाए हैं.
चेन्नई के ख़िलाफ़ 70 रन पर सिमटने के अलावा आरसीबी टीम हैदराबाद के ख़िलाफ़ भी केवल 113 रन पर ढह गई थी. जबकि उसी मैच में जॉनी बेयरस्टो और डेविड वॉर्नर ने शतक बनाए थे. यानि बैंगलोर की बल्लेबाज़ी में इस बार दम नहीं है.

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2. कमज़ोर फ़ील्डिंग
अभी तक हुए मैचों में बैंगलोर की फ़ील्डिंग बेहद कमज़ोर नज़र आई.
एक तरफ पवन नेगी ने सुनील नारायन का कैच बेहद ख़ूबसूरती से पकड़ा तो दूसरी तरफ़ कई आसान कैच टपकाए गए.
इससे पहले खेले गए चौथे मैच में, जो राजस्थान रॉयल्स ने जीता था, उसमें भी कम से कम पांच कैच छोड़े गए.
कोलकाता के ख़िलाफ़ तो दिनेश कार्तिक का एक शॉट ख़ुद कप्तान विराट कोहली के हाथों से टकराता हुए बाउंड्री लाइन पार कर गया.

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3. गेंदबाज़ी में धार नहीं
बैंगलोर की गेंदबाज़ी में अभी तक खेले गए मुक़ाबलों में कोई धार नज़र नहीं आई है.
यह भी सच है कि अगर रसेल का बल्ला बोलने लगे तो उन्हें रोकना मुश्किल है लेकिन असंभव तो नहीं है.
लेकिन बैंगलोर के पास एक भी ऐसा गेंदबाज़ नहीं था जो रसेल को यॉर्कर के जाल में फंसा पाता, जैसा दिल्ली के कैगिसो रबाडा ने कर दिखाया था.
तब रबाडा ही थे जिन्होंने रसेल को सुपर ओवर में अपनी यॉर्कर से रोका था और जीत का सेहरा अपनी टीम के सर बांधा था.
यहां तक कि जिस विकेट पर चेन्नई ने बैंगलोर का पुलिंदा इस आईपीएल के पहले ही मैच में अपने स्पिनर के दम पर महज़ 70 रन पर बांधा था, वहां भी स्पिन के मददगार विकेट पर उसके गेंदबाज़ केवल तीन विकेट ले सके थे.
केवल युजवेंद्र चहल एकमात्र ऐसे गेंदबाज़ हैं जिन्होंने कुछ अच्छी गेंदबाज़ी की है लेकिन एक ही गेंदबाज़ के दम पर तो मैच नही जीते जाते.
4. टीम के चयन पर सवाल
टीम के चयन में भी कप्तान कोहली चूक रहे हैं, ऐसी चर्चा है.
पिच को देखकर यह तय करना कि अंतिम ग्यारह कौन से खिलाड़ी हों, इसे लेकर तो टेस्ट क्रिकेट तक में विराट कोहली की आलोचना की जाती है.

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5. कप्तानी पर भी प्रश्न
विराट कोहली आज तक अपनी टीम को कभी आईपीएल का चैंपियन नहीं बना सके. इससे उनकी कप्तानी भी सवालों के घेरे में है.
किसी और फ्रैंचाइज़ी ने शायद ही इतने मौक़े किसी कप्तान को दिए हों.
गौतम गंभीर को तो कोलकाता ने तब टीम से निकाल दिया था जब उन्होंने टीम को चैंपियन तक बनाया था.
कभी विराट कोहली का बल्ला आईपीएल में रसेल की तरह ही बोलता था. आईपीएल के बाद ही उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ माना गया था.
लेकिन इस बार तो उनके बल्ले से केवल एक ही अर्धशतक निकला है. अगर विराट का बल्ला ख़ामोश रहा तो परिणाम भी ऐसे ही आते रहेंगे.
भला 70 रन पर लुढ़कने वाली टीम को कौन बचाएगा? अब तो ऐसा लगता है कि यह साल उनके लिए ठीक नहीं है. पहले तो ऑस्ट्रेलिया के हाथों टी-20 और एकदिवसीय सिरीज़ में हार मिली और अब आईपीएल में लगातार पांच हार.
कहीं विश्व कप से पहले उनका मनोबल ही ना टूट जाए. इसलिए बैंगलोर की टीम अब भी संभल जाए तो बेहतर है.
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