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साउथैम्पटन: इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारत के हाथ से क्यों फिसली जीत
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम भारत के पास इंग्लैंड के ख़िलाफ़ साउथैम्पटन टेस्ट में इतिहास रचने का मौका था.
सिर्फ़ चार दिन चले चौथे टेस्ट मैच में ढाई दिन भारतीय टीम हावी थी, लेकिन मेहमान खिलाड़ी अहम मौके पर दबाव कायम नहीं रख पाए. वहीं, मेजबान इंग्लैंड ने पहली पारी में पिछड़ने के बाद भी ज़ोरदार वापसी की और भारत के लिए सिरीज़ में वापसी के मौके बंद कर दिए.
अगर भारतीय टीम जीत हासिल कर लेती तो सिरीज़ 2-2 से बराबर हो जाती और आखिरी मैच निर्णायक होता लेकिन इंग्लैंड ने अब 3-1 की अजेय लीड हासिल कर ली है.
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने इस मैच में कई निजी उपलब्धियां हासिल कीं. उन्होंने सिरीज़ में पांच सौ रन पूरे किए और बतौर कप्तान टेस्ट मैचों में चार हज़ार रन बनाने वाले पहले भारतीय बने लेकिन तय दिख रही जीत गंवाने का मलाल तमाम उपलब्धियों पर हावी दिखा.
मैच के बाद भारतीय कप्तान कोहली ने हार के कारण गिनाते हुए कहा, "बीती रात हमें लगा कि जीत के 50 फ़ीसदी मौके हैं, लेकिन हम जैसा चाहते थे, वैसी शुरुआत नहीं मिल सकी. इंग्लैंड टीम ने हम पर लगातार दबाव बनाए रखा."
कोहली ने भले ही जीत का श्रेय इंग्लैंड के उम्दा प्रदर्शन को दिया लेकिन चौथे टेस्ट में मिली हार के लिए भारतीय टीम की ग़लतियां ज़्यादा जिम्मेदार रहीं.
मोइन अली का ख़ौफ
प्लेइंग इलेवन में वापसी को यादगार बनाने वाले मोइन अली का ख़ौफ भारतीय बल्लेबाज़ों पर हावी दिखा. भारतीय बल्लेबाज़ों को भले ही दुनिया में स्पिन के ख़िलाफ़ सबसे उम्दा माना जाता हो लेकिन इस मैच में वो अपनी छवि के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके.
मोइन अली ने पहली पारी में 63 रन देकर पांच और दूसरी पारी में 71 रन देकर चार विकेट लिए. इनमें कप्तान कोहली (58 रन) और अजिंक्य रहाणे (51 रन) के विकेट भी शामिल हैं. मैन ऑफ द मैच मोइन अली ने मैच में उस पिच पर नौ विकेट हासिल किए जहां भारतीय स्टार स्पिनर अश्विन सिर्फ़ तीन विकेट ले सके.
इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने मोइन की तारीफ करते हुए कहा, "आज मैंने उन्हें इंग्लैंड के लिए सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी करते देखा."
ढीला किया फंदा
साउथैम्पटन में भारतीय गेंदबाज़ों ने इंग्लैंड को दबाव में लेने के बाद पकड़ ढीली कर दी और टीम को इसका ख़ामियाजा उठाना पड़ा. इंग्लैंड ने पहली पारी में सिर्फ 86 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड के आखिरी चार विकेट लेने में 160 रन खर्च कर दिए और इंग्लैंड की टीम 246 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में कामयाब रही.
इसी तरह दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 92 रन पर पहले चार विकेट गंवा दिए थे लेकिन उसके बाद मेजबान टीम 271 रन बनाने में कामयाब रही. भारतीय गेंदबाज़ दोनों पारियों में सैम करन को रोकने का फॉर्मूला नहीं खोज सके. करन ने पहली पारी में 78 और दूसरी पारी में 46 रन बनाए. भारतीय कप्तान कोहली ने भी करन की तारीफ की.
बल्लेबाज़ों का समर्पण
साउथैम्पटन में भारत सिर्फ़ तीन बल्लेबाज़ो की टीम नज़र आई. पहली पारी में चेतेश्वर पुजारा (नाबाद 132 रन) और कोहली (46 रन) ही विकेट पर खड़े होने का दम दिखा सके. वहीं दूसरी पारी में कप्तान कोहली और अजिंक्य रहाणे ही इंग्लैंड के गेंदबाज़ों का प्रतिरोध कर सके.
ओपनरों की नाकामी कप्तान को भी खूब खली और उन्होंने मैच के बाद इसे हार की वजह भी बताया. दिनेश कार्तिक पर वरीयता हासिल करने वाले ऋषभ पंत और ऑलराउंडर का दर्ज़ा रखने वाले हार्दिक पांड्या अपने पर दिखाए भरोसे पर खरे नहीं उतरे.
चयन में खामी
भारतीय बल्लेबाज़ स्पिन के ख़िलाफ मजबूत माने जाते हैं. इसके बाद भी इंग्लैंड ने पिच को बेहतर तरीके से पढ़ा और दो स्पिनरों मोइन अली और आदिल राशिद को टीम में जगह दी. जबकि भारतीय टीम सिर्फ़ एक स्पिनर आर अश्विन के साथ मैदान में उतरी. अश्विन भी तय में नहीं दिखे. रविंद्र जडेजा पर वरीयता हासिल करने वाले हार्दिक पांड्या सिर्फ एक विकेट ले सके. वो बल्ले से भी नाकाम रहे.
चुभती रहेगी हार
रैंकिंग और दमखम के लिहाज से भारतीय टीम सिरीज़ शुरू होने के पहले मेजबान टीम से बेहतर नज़र आ रही थी. लेकिन बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड ने भारत की ग़लतियों का फायदा उठाया और करीबी मुक़ाबले में 31 रन से जीत हासिल की.
लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे मैच में मेजबान टीम पूरी तरह हावी रही और पारी और 159 रन से जीत हासिल की.
तीसरे मैच में भारत ने वापसी की और इंग्लैंड को 203 रन से हराया.
चौथे मैच में भारत के पास सिरीज़ में बराबरी हासिल करने का मौका था लेकिन इंग्लैंड ने पहली पारी में पिछड़ने के बाद भी दमदार वापसी की और मैच 60 रन से जीत लिया.
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