You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
एजबेस्टन टेस्ट: इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारत की हार की 5 वजहें
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, दिल्ली
-इंग्लैंड 31 रनों से जीता, पाँच मैचों की सिरीज़ में 1-0 की बढ़त
-बेन स्टोक्स ने दूसरी पारी में चटकाए 4 विकेट
-इंग्लैंड: पहली पारी 287 रन, दूसरी पारी 180 रन
-भारत: पहली पारी 274 रन, दूसरी पारी 162 रन
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एजबेस्टन टेस्ट के चौथे दिन जब भारत बचे हुए पाँच विकेटों के साथ मैदान पर उतरा तो उसे इस बात का पक्का यकीन था कि जब तक कप्तान विराट कोहली के हाथ में बल्ला है, जीत उसकी मुट्ठी में है.
एजबेस्टन का विकेट बेशक गेंदबाज़ों के मुफीद था. यही वजह थी कि मेज़बान कप्तान जो रूट और कोहली को छोड़कर दोनों टीमों का कोई भी धुरंधर बल्लेबाज़ गेंदबाज़ों के लिए सिरदर्द नहीं बन सका. वो कोहली ही थे जिन्होंने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में खूंटा गाड़े रखा. पहली पारी में उन्होंने 149 रनों की आकर्षक पारी खेली थी, दूसरी पारी में भी हाफ़ सेंचुरी बनाने के बाद वो मजबूती के साथ डटे हुए थे.
लेकिन पारी के 47वें ओवर में बेन स्टोक्स की तीसरी गेंद जैसे ही कोहली के पाएं पैड पर टकराई, भारतीय खेमे में सन्नाटा पसर गया और यहीं पर भारत की शिकस्त तकरीबन तय हो गई थी. कोहली ने अंपायर के फ़ैसले पर रिव्यू भी लिया, लेकिन उनका ये दांव भी बेकार साबित हुआ.
कोहली एंड कंपनी की हार की ये रहे बड़े कारण
खराब शुरुआत- कप्तान को छोड़कर यूँ तो भारत का शीर्ष बल्लेबाज़ी क्रम पूरी तरह विफल रहा, लेकिन सलामी बल्लेबाज़ों ने पूरी तरह निराश किया. मुरली विजय दोनों पारियों में कुल जमा (20 और 6) 26 रन ही बना सके, जबकि बाएं हाथ के शिखर धवन (26 और 13) 39 रनों का योगदान ही दे सके.
वार्म अप की कमी- भारत ने टी-20 और वनडे सिरीज़ के बाद मिले खाली समय में अभ्यास मैच नहीं खेले, इसकी कमी बल्लेबाज़ों में साफ़ नज़र आई. अकेले कप्तान विराट कोहली की तैयारी ही पूरी थी. मुरली विजय, अजिंक्य रहाणे, दिनेश कार्तिक स्विंग गेंदबाज़ी के सामने लाचार नज़र आए. स्लिप एरिया में भारत की फील्डिंग बेहद ख़राब रही. क्षेत्ररक्षकों ने कई कैच टपकाए.
इंग्लैंड के पुछल्लों का दम- इंग्लैंड की दूसरी पारी में भारत के पास अंग्रेज़ टीम को सस्ते में समेटने का मौका था. सात बल्लेबाज़ 87 रन पर पैवेलियन लौट चुके थे, लेकिन इसके बाद आखिरी क्रम के बल्लेबाज़ों ने भारतीय गेंदबाज़ों को खूब छकाया और टीम का स्कोर 180 रन तक पहुँचाया. बाएं हाथ के बल्लेबाज़ सैम करन ने आठवें विकेट के लिए आदिल रशीद के साथ 78 रनों की और फिर नौवें विकेट के लिए स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ 41 रनों की अहम साझेदारी की. करन ने 65 रनों पर दो छक्कों और 9 चौकों की मदद से 63 रन की पारी खेली. रशीद ने 16 और स्टुअर्ट ब्रॉड ने 11 रनों का योगदान दिया.
तकनीकी खामी: आउटस्विंग गेंदों के साथ छेड़छाड़ करने की भारतीय बल्लेबाज़ों की पुरानी आदत का खामियाजा भारत को हार के रूप में चुकाना पड़ा. दिनेश कार्तिक हों या हार्दिक पाँड्या उन्होंने ऐसी गेंदों पर शॉट खेले, जिन पर कोई शॉट्स नहीं खेलना ही बेहतर माना जाता है. विराट कोहली ने अपनी लंबी पारी में ऑफ़ स्टंप के बाहर जाती कई गेंदों को छोड़ा.
छुपे हथियार: भारतीय टीम को बाएं हाथ के मध्यम तेज़ गेंदबाज़ सैम करन के बारे में ख़ास कुछ पता नहीं था. यही वजह थी कि उन्होंने कई भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान किया. करन ने पहली पारी में चार विकेट चटकाए और दूसरी पारी में एक विकेट लिया. सैम करन को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ़ द मैच चुना गया.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)