तीन साल की उम्र में ही बल्ला टटोलने लगे थे शुबमन

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- Author, सूर्यांशी पांडे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अंडर-19 विश्वकप में भारत बनाम पाकिस्तान सेमीफ़ाइनल मैच और फिर 94 गेंदों पर नाबाद 102 रन.
भारत को 272 रन के आंकड़े तक पहुंचाने वाला शुबमन गिल का ये शतक, मां कीरत गिल की आंखों में खुशियों के आंसू लेकर आया.
न्यूज़ीलैंड में क्राइस्टचर्च के मैदान पर जैसे ही भारत 203 रनों से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीता तो पंजाब के मोहाली में रह रहे शुबमन गिल के माता-पिता को बधाइयों के फ़ोन आना शुरू हो गए.

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शुबमन की मां कीरत गिल बताती हैं, ''हम पंजाब के फज़िल्का ज़िले के एक गांव में रहते थे. मेरे पति लखविंदर को क्रिकेट देखने का शौक तो है ही, साथ ही वह सचिन के बहुत बड़े फ़ैन हैं. उनका यह जुनून मेरे बेटे में भी दिखने लगा. तीन साल की उम्र से ही वह क्रिकेट के बल्ले को टटोलने लगा था.''

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शुबमन के पिता लखविंदर सिंह फज़िल्का में अपनी ज़मीन पर खेती कराते हैं.
लेकिन अपने बेटे के इस जुनून को सही सांचे में ढालने के लिए शुबमन के माता-पिता ने फज़िल्का छोड़ने का फ़ैसला किया क्योंकि कीरत गिल के मुताबिक़ फज़िल्का में क्रिकेट को लेकर कोई व्यवस्था नहीं थी और मोहाली ही जाकर कुछ हो सकता था. 2007 में वह मोहाली आ गए.

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कैसे खिलाड़ी हैं शुबमन?
उस फ़ैसले ने मानो शुबमन गिल के सपनों को पंख दे दिए. अंडर-19 का ये बल्लेबाज़ जब पहली बार अंडर-16 के विजय मर्चेंट ट्रॉफ़ी के लिए खेला तो पंजाब के लिए उसने 200 रन बनाए.
यही नहीं बीसीसीआई द्वारा साल 2013-14 और 2014-15 में 'बेस्ट जूनियर क्रिकेटर' के पुरस्कार से भी नवाज़े गए शुबमन.
और आईपीएल नीलामी में इस खिलाड़ी के बल्ले पर भरोसा जताते हुए कोलकाता नाइट राइडर्स ने 1.8 करोड़ में शुबमन को खरीदा.

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शुबमन के पिता हैं कोच?
शुबमन की बल्लेबाज़ी के हुनर के बारे में जब बीबीसी ने उनकी मां से पूछा तो उन्होंने कहा, ''शुरू में मोहाली में जब ट्रेनिंग के लिए डाला तो ज़्यादा संख्या में बच्चे होने के कारण कोच मुश्किल से 5 मिनट एक-एक खिलाड़ी को दे पाते थे. शुबमन के पापा फज़िल्का में क्रिकेट सिखाते ही थे और मोहाली आकर भी उन्होंने उसको ट्रेन करने का ज़िम्मा अपने हाथ में लिया.''
दोस्त के घर में नेट-प्रैक्टिस कराना, खेती के दौरान गेंद डालना, क़रीब 3 से 4 घंटे रोज़ प्रैक्टिस कराते लखविंदर सिंह.
कीरत गिल कहती हैं, ''मेरे बेटे के कोच मेरे पति हैं. उन्होंने उसकी ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी.''

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शुबमनछोटा है, लेकिन बच्चा नहीं!
शुबमन की बल्लेबाज़ी पर क्रिकेट विशेषज्ञ आकाश चोपड़ा ने कहा कि, ''शुबमन का खेल जो लोग देखते आए हैं उन्हें हैरानी नहीं हुई होगी. अगर U-19 विश्वकप के क्वॉटर फ़ाइनल मुक़ाबले की बात करें तो वहां भी वह 86 रन बनाने में कामयाब रहे थे. ये खिलाड़ी छोटा ज़रूर है, लेकिन मैदान पर अपनी उम्र से कई गुना ज़्यादा समझदार मालूम पड़ता है.''
राहुल द्रविड़ की तारीफ़ करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा कि ''U-19 की पूरी टीम की जीत के असल सूत्रधार तो इस टीम के कोच हैं जिन्होंने पूरी टीम को ऐसा ट्रेन किया कि आज ये नतीजे सामने आए हैं.''
3 फ़रवरी को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत U-19 विश्वकप का फ़ाइनल खेलने उतरेगी.
शुबमन की बल्लेबाज़ी हो, इशान पोरेल और कमलेश नागरकोटी की तेज़ गेंदबाज़ी हो या फिर अनुकूल रॉय की स्पिन हो, U-19 के खिलाड़ियों को देखकर लगता है भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्जवल है.
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