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दंगल ने की छवि ख़राब : गीता फोगाट के कोच
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
इन दिनों सिनेमा हॉल के बड़े पर्दे पर आमिर खान की 'दंगल' कामयाबी के झंडे गाड़ रही है. अब कहानी फ़िल्मी है तो रील लाइफ, रीयल लाइफ से थोड़ा अलग तो होगी ही.
फ़िल्म शुरू होने से पहले ही पर्दे पर लिखा आ जाता है कि कहानी काल्पनिक है.
वैसे कहानी इतनी काल्पनिक भी नहीं है क्योंकि गीता फोगाट और बबीता फोगाट ने साल 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना जलवा स्वर्ण और रजत पदक जीतकर तो दिखाया ही था.
'दंगल' फ़िल्म में दिखाया गया है कि गीता और बबीता के पिता महावीर फोगाट की राष्ट्रीय कोच से कुश्ती के दांव-पेच को लेकर तकरार चलती रहती है. महावीर फोगाट ख़ुद एक राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं.
यहां तक कि फिल्म के क्लाइमैक्स में दिखाया गया है कि महावीर फोगाट को एक कमरे में बंद कर दिया जाता है ताकि फ़ाइनल मुक़ाबले में वे अपनी ही कोचिंग देना न शुरू कर दें. लेकिन दरअसल हक़ीक़त इससे अलग है.
साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान भारतीय महिला पहलवान टीम के चीफ़ कोच रहे प्यारा राम सोंधी ने फगवाड़ा से बीबीसी को ख़ास बातचीत में बताया कि महावीर फोगाट बेहद सज्जन व्यक्ति हैं और उन्हें कमरे में बंद करने वाली बात पूरी तरह से ग़लत है.
उन्होंने कभी भी नैशनल कैंप के दौरान गीता और बबीता की ट्रेनिंग को लेकर कोई वाद-विवाद नहीं किया. यहां तक कि फ़िल्म में गीता और कोच के बीच दिखाए गए मतभेद की बात से भी सोंधी ने इनकार किया.
कोच प्यारे राम सोंधी के मुताबिक महावीर फोगाट को अमूमन चुपचाप रहने वाले व्यक्ति हैं. इसके अलावा गीता और बबीता ने ट्रेनिंग कैंप के दौरान कभी कोई फ़िल्म सिनेमा हॉल जाकर नहीं देखी.
प्यारा राम सोंधी आगे कहते हैं कि महावीर फोगाट तो नहीं लेकिन एक दूसरे पूर्व पहलवान प्रशिक्षकों की ग़ैर मौजूदगी में अपनी बेटी को ट्रेनिंग देने के कुछ अलग तरीके ज़रूर बताते थे.
आखिरकार उन्हें समझाया गया कि गांव-देहात की कुश्ती प्रतिस्पर्धाओं और अतंरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं की ट्रेनिंग में बहुत अंतर है. बाद में वह भी मान गए कि सच क्या है.
प्यारा राम सोंधी ने बताया कि उनकी कभी भी महावीर फोगाट से बहस तो क्या लंबी बातचीत तक नहीं हुई. उनसे बस दो-तीन मुलाक़ात ही हुई है.
यहां तक कि जब गीता और बबीता कामयाबी की दास्तान लिख रही थीं तब उन्हें यह तक पता नहीं था कि महावीर फोगाट दर्शकों के बीच कहां बैठे हैं. उन दिनों तो पूरी भारतीय महिला टीम और कोच गेम्स विलेज में ठहरे थे. महावीर फोगाट और उनका परिवार एक दर्शक के रूप में ही स्टेडियम में मौजूद था.
लड़कों से लड़कियों की ट्रेनिंग की बात को लेकर प्यारा राम सोंधी ने कहा की जब उन्होंने विदेशों में ऐसा देखा तो उनके भी विचार बदले, लेकिन बड़े वज़न की लड़कियों की ट्रेनिग कम वज़न के पहलवानों से कराई जाती थी.
प्यारा राम सोंधी इस बात को स्वीकार करते हैं कि गीता और बबीता को लड़कों के साथ बचपन से मुक़ाबला करने की आदत ने बड़ा पहलवान बनाया. इसका सीधा सा कारण है कि लड़कों के पास लड़कियों के मुक़ाबले बेहतर तकनीक होती है.
सोंधी यह भी बताते हैं कि गीता और बबीता ट्रेनिंग के दौरान शाकाहारी थीं. हालांकि फिल्म में उन्हें प्रोटीन के लिए नॉनवेज खाते हुए दिखाया गया है. वैसे ख़ुद प्यारा राम सोंधी ने अभी तक 'दंगल' नहीं देखी है लेकिन उनके साथी कोच उन्हें बता रहे हैं कि फ़िल्म बेहतरीन है.
जहां तक फ़िल्म में नेशनल कोच को 'खलनायक' की तरह पेश करने की बात है तो उसे लेकर प्यारा राम सोंधी का कहना है कि इसके ख़िलाफ कोई कदम तो वह फ़िल्म देखने के बाद ही उठाएंगे.
मीडिया रिपोर्टों में 'दंगल' के निर्माताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की ख़बरों से भी प्यारा राम सोंधी ने इनकार किया, हालांकि उन्होंने इतना ज़रूर माना कि वह फ़िल्म में कोच की ख़राब छवि पेश करने से दुखी हैं. उन्होंने कहा कि फ़िल्म देखने के बाद ही वो कुश्ती फेडरेशन से बात करेंगे.