'अगर किसी हिंदू संंगठन ने किया होता तो...'

बुर्के में महिला

इमेज स्रोत, AFP

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को दिए एक हलफ़नामे में कहा है कि समाज सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ में बदलाव नहीं किया जा सकता.

बोर्ड ने तीन तलाक़ और पुरुषों को चार शादियां कर सकने की इजाज़त देने वाले इस्लामी क़ानून का <link type="page"><caption> समर्थन किया</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/09/160902_triple_talaq_sc_mplb_sjm" platform="highweb"/></link> है और कहा है कि इस क़ानून का मक़सद अवैध संबंधों को रोकना और महिलाओं की रक्षा करना है. बोर्ड ने यह भी कहा है कि ट्रिपल तलाक़ मुस्लिम महिलाओं को अपने पतियों के हाथों मारे जाने से बचाता है.

पर्सनल लॉ बोर्ड की इस दलील को लेकर भारतीय सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा हो रही है. लोग #tripletalaq हैशटैग के साथ इस पर बात कर रहे हैं. कई लोग इसे ख़त्म किए जाने के पक्ष में अपनी बात रख रहे हैं.

ट्रिपल तलाक पर ट्विटर में लोग बात कर रहे हैं

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा “मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक़ का समर्थन करने की यह दलील कि नहीं तो पति अपनी पत्नियों को मार देंगे! बेहद अजीब तर्क है.”

लेखक सुधींद्र कुलकर्णी ने लिखा, “लॉ बोर्ड का पक्ष असंवैधानिक और महिला विरोधी है. सभी को इसका विरोध करना चाहिए.”

ट्रिपल तलाक पर ट्विटर में लोग बात कर रहे हैं

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “अगर कोई हिंदू संगठन तलाक़, बहुपत्नी प्रथा या पुरुषों के बड़े होने के बारे में ऐसी दलील देता तो वो अब तक हल्ला मच चुका होता.”

उनके इस ट्वीट के उत्तर में लाट साहेब नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा ”यह इस्लाम विरोधी भी है.”

ट्रिपल तलाक पर ट्विटर में लोग बात कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कँडेय काटजू ने तंज़ कसते हुए ट्वीट किया, “ट्रिपल तलाक़ के समर्थन में सामंतवादी अहमक़ों के दल ने एक ख़ूबसूरत बात कही है.”

एंजेल आईज़ नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “इस बयान ने हमारे सभी मुस्लिम भाई बहनों को शर्मसार कर दिया.”

मुरली लिखते हैं, “चलो इस मामले में एक बात पर एकमत तो है. मुस्लिम पर्सनल लॉ को बदलने का समय हो गया है.”

ट्रिपल तलाक पर ट्विटर में लोग बात कर रहे हैं

पत्रकार सागारिका घोष ने लिखा, “मीनू मसानी जैसे उदारवादियों के प्रस्तावित यूनिफार्म सिविल कोड न अपना कर एक मौक़ा खो दिया.”

इसके जवाब में पारस घोष ने लिखा, “इस्लाम में महिलाओं को नीचा देखा जाता है. उन्हें कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं. उन्हें बच्चे पैदा करने की मशीनों के तौर पर देखा जाता है.”

लेकिन कई लोगों के मुताबिक़ ट्रिपल तलाक़ सही है. ख़ालिदा परवीन ने लिखा ”यह महिला विरोधी नहीं है.”

ट्रिपल तलाक पर ट्विटर में लोग बात कर रहे हैं

एक अन्य ट्वीट में वो लिखती हैं, “अगर कुऱान में जैसा कहा गया है वैसे ही इसका पालन हो तो यह सही तरीक़ा है.”

मी.रश्मी ने लिखा है, “हां, अपनी पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए उसको छोड़ देना उसे ज़िंदा जलाने से तो अच्छा है.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबु</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>क और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)