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कहां पड़ रही है पलकें जमा देने वाली ये ठंड?
दुनिया के कई इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन दुनिया का एक इलाका ऐसा है जहां ठंड ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
रूस में साइबेरिया के ओइमाकॉन गांव में पारा - 62 डिग्री तक जा पहुंचा है. यहां हर जगह सिर्फ बर्फ की मोटी चादर नज़र आ रही है.
वहां रहने वाले लोग सोशल मीडिया के ज़रिए दुनिया को अपनी हालत के बारे में बता रहे हैं.
रूस के याकुत्स्क की रहने वाली एक 24 वर्षीय महिला अनस्तासिया ग्रुज़देवा की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें ठंड की वजह से उनकी पलकें तक जम गई हैं.
यहां तापमान इतना ज़्यादा गिर गया है कि पर्यटकों को लुभाने के लिए लगाया गया डि़जिटल थर्मामीटर तक टूट गया.
ओइमाकॉन में 1933 में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया था जब पारा शून्य से 68 डिग्री से नीचे पहुंच गया था.
दुनिया का सबसे ठंडा इलाका
ओइमाकॉन बर्फ की घाटी में बसा एक छोटा सा गांव है. यहां दूर-दूर तक ज़मीन नज़र नहीं आती है. हर तरफ़ बर्फ ही बर्फ दिखती है.
'पोल ऑफ कोल्ड' कहा जाने वाला ओइमाकॉन गांव, इंसानों की बस्ती वाली दुनिया की सबसे ठंडी जगह है.
दिलचस्प बात ये है कि ओइमाकॉन नाम का मतलब ऐसी जगह से होता है जहां पानी ना जम सके, लेकिन यहां की स्थितियां इसके नाम से बिल्कुल उलट हैं.
इस छोटे से गांव में सिर्फ 500 लोग रहते हैं, जो मुश्किल स्थितियों से लड़ते हुए अपना काम सामान्य तौर पर करते रहते हैं. लोग यहां मुश्किल हालातों में जीते हैं. देखते ही देखते पानी जम जाता है, चेहरा बर्फ से ढंक जाता है.
ओइमाकॉन गांव में गाड़ी चलाने से पहले उसे ऐसे गैरेज में रखना पड़ता है जहां हीटर लगा हो.
ओइमाकॉन में क्यों रहते हैं लोग
तस्वीरों में लोगों की हालत देखकर आप सोच रहे होंगे कि लोग इतने ठंडे इलाके में रहते क्यों हैं.
इस सवाल का जवाब आइमोकॉन के इतिहास में छिपा है. दरअसल 1920-30 में ये जगह फौज और गडरियों के कुछ समय ठहरने की जगह थी.
सोवियत सरकार ने यहां के नोमैडिक लोगों को नियंत्रित करने की कोशिश की. लेकिन ऐसा करने में नाकाम रहने पर उन्हें हमेशा के लिए आइमोकॉन में बसा दिया. तब से लोग इस ठंडी जगह में बसे हैं.
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