BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 11 नवंबर, 2008 को 11:38 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
उपग्रह करेंगे हैजा फैलने की भविष्यवाणी
समुद्री वातावरण
हैजे की महामारी समुद्र के तापमान में वृद्धि के बाद फैलती है.
शोधकर्ताओं ने ऐसी प्रणाली विकसित की है जिससे उपग्रह के माध्यम से देश के समुद्र के किनारे स्थित इलाक़ों में हैज़ा फैलने की भविष्यवाणी की जाएगी.

उन्होंने बताया कि हैजा की महामारी समुद्र के तापमान में वृद्धि के बाद फैलती है.

इससे भारत और बांग्लादेश को पहले से ही इस ख़तरे से आगाह करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है जहाँ समय-समय पर यह महामारी फैल जाती है.

समुद्र के तापमान के साथ बढ़ने वाले सूक्ष्म प्राणी ही पेयजल आपूर्ति में हैजे के रोगाणु पहुँचाते हैं.

समुद्री पौधा

यह उपग्रह बंगाल की खाड़ी में समुद्र के तापमान में हो रहे बदलावों पर नज़र रखता है और फ़ाइटोप्लेंक्टॉन की मात्रा मापता है.

फ़ाइटोप्लेंक्टॉन एक छोटा सा पौधा होता है जो समुद्र के वातावरण में ही पलता है.

शोधार्थियों ने पाया कि समुद्र के तापमान में होने वाली वृद्धि के साथ भारत के कोलकाता और बांग्लादेश के मतलेब में सबसे पहले हैजे की महामारी फैली जिससे फ़ाइटोप्लेंक्टॉन की मात्रा में भी वृद्धि हुई.

पेयजल
समुद्र का स्तर बढ़ता है तो रोगाणु निचले इलाकों की पेयजल आपूर्ति में पहुँच जाते हैं.

युनीवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटर स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर रीता कोलवैल पिछले 30 सालों से हैजे की महामारी पर अध्ययन कर रही हैं.

वे कहती हैं कि उपग्रह मॉनिटरिंग ही हैजे की महामारी से बचाव का एकमात्र उपाय है.

पेयजल आपूर्ति

उन्होंने कहा, "हम उपग्रह से उपलब्ध डाटा को यह पता करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं कि हैजे की महामारी कब फैल सकती है. इससे स्वास्थ्य अधिकारियों को पता लगेगा कि कब उन्हें पेयजल इत्यादि के प्रति लोगों को आगाह करना है और हैजे से बचाव के लिए संसाधन जुटाने हैं."

हैजे के रोगाणु प्राकृतिक रूप से उन समुद्री प्राणियों की आंत में रहते हैं जिन्हें कोपपोड कहते हैं और जो फ़ाइटोप्लेंक्टॉन पर पलते हैं.

जब समुद्र का स्तर बढ़ता है तो कोपपोड को भारत और बांग्लादेश के निचले इलाकों के पेयजल की आपूर्ति में जाने का रास्ता मिल जाता है.

प्रोफ़ेसर कोलवैल कहती हैं कि कोपपोड से बचने के लिए पानी को साधारण कपड़े से छानना ही काफ़ी है और इससे आश्चर्यजनक रूप से हैजे से बचा जा सकता है.

उन्होंने कहा, "हमने पाया कि हम सिर्फ़ प्लेंक्टॉन को छानकर ही हैजे को 40 से 50 फ़ीसदी घटा सकते हैं."

शोधार्थियों को उम्मीद है कि वे उपग्रह मॉनिटरिंग के माध्यम से जल्द ही हैजे की महामारी फैलने से सप्ताहों या महीनों पहले ही हैजे की भविष्यवाणी करने में सफल होंगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
पानी घटने के साथ महामारी की आशंका
07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
उड़ीसा में हैज़े से 80 की मौत
27 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
'बाढ़ पीड़ितों में महामारी का खतरा'
07 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
आंध्र में 130 की मौत, महामारी का ख़तरा
13 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
'महामारी' का आँखों देखा हाल
28 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस
महाराष्ट्र में अब महामारी का ख़तरा
29 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस
चूहों ने अधिकारियों को झुकाया
30 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>