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उड़ीसा में हैज़े से 80 की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि उड़ीसा के तीन आदिवासी ज़िलों में हैज़े के कारण पिछले 15 दिनों में लगभग 80 लोगों की मौत हो गई है. उड़ीसा के कालाहांडी, कोरापुत और रायगढ़ ज़िलों में दो हज़ार से अधिक लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमित खाने और पानी के कारण हैज़े ने व्यापक रूप ले लिया है. अपुष्ट ख़बरों के अनुसार मरनेवालों की संख्या 200 तक हो सकती है. राजधानी भुवनेश्वर से लगभग 500 किलोमीटर दूर काशीपुर इलाक़ा इससे सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. ज़िले के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी बेनूधर नायक का कहना था कि यहाँ कम से कम 48 लोगों की मौत हो गई है. कालाहांडी ज़िले से भी छह लोगों की मौत की ख़बर है. स्थिति गंभीर शुरुआत में संदेह था कि ये डायरिया है लेकिन बाद में भुवनेश्वर की क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला और एमकेसीजी अस्पताल के संक्रमण विभाग ने हैज़े की पुष्टि की.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित गांवों से 43 नमूने लिए गए जिनमें से 31 मामलों में हैजे के वायरस की पुष्टि हुई. उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घोषणा की है कि प्रभावित लोगों का विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज किया जाएगा. मुख्यमंत्री पटनायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दुर्योधन मांझी ने विशेष स्वास्थ्य दल के साथ प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया. स्वास्थ्य सचिव चिन्मय बसु 12 स्वास्थ्य टीमों के साथ शुक्रवार से काशीपुर में डेरा डाले हुए हैं ताकि बीमारी और न फैले. दूसरी ओर भुवनेश्वर में एक दल स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा में भारी बारिश से 21 की मौत04 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में भ्रूण अवशेष मिलने से हड़कंप23 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस आठ साल की क़ीमत आठ लाख रुपए21 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस हरियाली आई, खुशहाली नहीं14 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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