BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 02 मार्च, 2008 को 22:37 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
विटामिन ई का सेवन ज़रा संभल कर
विटामिन-ई
विटामिन-ई को शरीर के लिए ज़रूरी माना जाता है
ताज़ा शोध में पता चला है कि विटामिन-ई की गोलियां ज़्यादा खाने से फेफड़े के कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

इस अमरीकी शोध में 77 हज़ार लोगों का परीक्षण करने पर पाया गया कि वो लंबे समय से चार सौ मिलीग्राम की ख़ुराक रोज़ाना ले रहे हैं. इनमें कैंसर का ख़तरा धूम्रपान करने वालों की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है.

शोध को छापते हुए ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ़ रेस्परेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन’ में जानकार लोगों को विटामिन के लिए अधिकतर फलों और सब्ज़ियों पर ही निर्भर रहने की सलाह दी गई है.

कोलोरेडो विश्वविद्यालय के डॉक्टर टिम बेयर्स का कहना है कि एक स्वस्थ, संतुलित आहार व्यक्ति में सभी तरह के ज़रूरी पोषक तत्वों को पूरा कर कैंसर का ख़तरा कम करता है.

 हमेशा फ़ायदेमंद माने जाने वाली विटामिन-ई की गोलियों में कुछ मात्रा में ऐसे पदार्थ भी होते हैं जो फेफड़े के कैंसर के ख़तरे को बढ़ाते हैं
डॉक्टर क्रिस्टोफ़र स्लेटर, शोधकर्ता

शोधकर्ताओं ने 50 से 76 वर्ष के लोगों में विटामिन-सी, फ़ोलिक एसिड और विटामिन-ई पूरक के रोज़ाना प्रयोग की निगरानी चार साल तक की.

इसके बाद 512 लोगों में फेफड़े का कैंसर विकसित हो गया.

शोधकर्ताओं ने इसके लिए सभी बातों जैसे पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान और उम्र सभी को कैंसर के ख़तरे से जोड़ा लेकिन विटामिन-ई को ही इसकी प्रमुख वजह पाया.

विटामिन-ई को एंटीऑक्सीडेंट यानी उपचायक के रूप में जाना जाता है. ये कोशिका को फ़्री रेडिकल्स से बचाता है.

लेकिन अमरीकी शोधकर्ता मानते हैं कि इसकी अधिक खुराक विष की तरह काम करती है जो कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है.

विषैला असर

 धूम्रपान छोड़ना ही कई तरह के कैंसरों से बचने का कारगर उपाय है. किसी तरह की कोई आहार या विटामिन की गोलियां सिगरेट के धुएं के ज़हर को नहीं ख़त्म कर सकता
हेनरी स्कॉक्राफ़, कैंसर रिसर्च यूके

मुख्य शोधकर्ता, ‘युनिवर्सिटी ऑफ वाशिंग्टन’ के डॉक्टर क्रिस्टोफ़र स्लेटर ने कहा, “हमेशा फ़ायदेमंद माने जाने वाली विटामिन-ई की गोलियों कुछ मात्रा में ऐसे पदार्थ भी होते हैं जो फेफड़े में कैंसर के ख़तरे को बढ़ाते हैं.”

“ये नतीजे डॉक्टरों को मरीज़ो के लिए ये सलाह देने के लिए प्रेरित करता है कि इस तरह की विटामिन पूरक कैंसर के ख़तरे को कम नहीं कर सकते.”

लेकिन ‘कैंसर रिसर्च यूके’ के वरिष्ठ विज्ञान सूचना अधिकारी हेनरी स्कॉक्राफ़ ने कहा, “फ़िलहाल हम कुछ नहीं कह सकते कि विटामिन-ई की पूरक गोलियां कैंसर के खतरे को कम करती हैं या नहीं.”

उन्होंने कहा, “कुछ शोध बताते हैं कि ये फ़ायदा पहुचातीं हैं, लेकिन कई और कहती हैं कोई फ़र्क नहीं पड़ता है, जैसे ये शोध बताता है कि ख़तरनाक हो सकती हैं.”

“धूम्रपान छोड़ना ही कई तरह के कैंसरों से बचने का कारगर उपाय है. किसी तरह की कोई आहार या विटामिन की गोलियां सिगरेट के धुएं के ज़हर को नहीं ख़त्म कर सकता.”

elderly people indiaलाभदायक विटामिन-ई..
विटामिन-ई बुज़ुर्गों की शारीरिक क्षमता को गिरने से रोक सकता है.
फल विटामिन भी बेअसर
एक मोटापा हज़ार मुसीबत, चर्बी की वजह से विटामिन भी काम नहीं आएँगे.
सुनहरा चावलविटामिन ए वाला चावल
सुनहरा चावल दूसरी क़िस्मों की तुलना में बीस गुना विटामिन ए पैदा करता है.
इससे जुड़ी ख़बरें
स्तन कैंसर में आशा की किरण
08 अगस्त, 2004 | विज्ञान
धूम्रपान की काट मछली?
07 जनवरी, 2003 | विज्ञान
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>