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अब विटामिन ए वाला 'सुनहरा चावल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने चावल की एक नई क़िस्म विकसित की है जिससे अब विटामिन ए ज़्यादा मात्रा में मिल सकता है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह 'सुनहरा चावल' बीटा कैरोटिन पैदा करता है जो विटामिन ए में तब्दील होता है. उनका दावा है कि यह चावल इस समय मौजूद प्रजातियों की तुलना में बीस गुना विटामिन ए पैदा करता है. उल्लेखनीय है कि विटामिन ए की कमी से आँखों की रोशनी कम होती है और अंधापन भी आ सकता है. विकासशील देशों में विटामिन ए की कमी एक बड़ी समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के अनुसार दुनिया में हर साल विटामिन ए की कमी से पाँच लाख बच्चे बच्चों के आँखों की रोशनी चली जाती है. हालांकि बाज़ार में आने से पहले इसे कई परीक्षणों से गुज़रना होगा. 'सुनहरा चावल' को लेकर प्रयोगों से जुड़े कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ गुरुदेव ख़ुश ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "प्रयोगशाला से खेतों में आने से पहले इसे तीन परीक्षणों से गुज़रना होगा. एक तो यह कि क्या यह खाद्य के रुप में सुरक्षित है, दूसरा क्या इसकी फसल दूसरी फसलों की तरह पर्याप्त होगी और तीसरे यह कि क्या वास्तव में इसमें विटामिन ए उतना ही है जितने का दावा किया जा रहा है." डॉ गुरुदेव ख़ुश ने कहा कि वे मानते हैं कि इस 'सुनहरे चावल' से ग़रीबों को बहुत फ़ायदा होगा और कुपोषण की समस्या का एक हल निकल सकेगा. परीक्षण के लिए बीज पाँच साल पहले जब स्विट्ज़रलैंड की शोधशाला में पहली बार सुनहरा चावल पैदा किया गया था तो इसका व्यापक स्वागत हुआ था. लेकिन उस प्रजाति में विटामिन ए की मात्रा इतनी नहीं थी कि वह बच्चों को प्रतिदिन आवश्यक विटामिन की मात्रा की आपूर्ति कर पाती.
'सुनहरे चावल' की नई प्रजाति ब्रिटेन की शोध शालाओं में बायोटेक्नालॉजी कंपनी सिंजेंटा द्वारा पैदा की गई है. सिंजेंटा ने कहा है कि वह आगे शोध के लिए इस चावल के बीज एशियाई देशों में उपलब्ध करवा रही है और वे यदि एशियाई देशों की सरकारें इसकी अनुमति देती है तो इसका खेतों में परीक्षण भी हो सकता है. हालांकि सभी लोग इस बात से सहमत नहीं हैं कि 'सुनहरा चावल' विटामिन ए की कमी का कोई विकल्प है. कुछ कृषि वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों का कहना है कि संतुलित भोजन को ही विटामिन का आधार बनाना अच्छा होगा. लेकिन 'सुनहरा चावल' ने साबित कर दिया है कि जेनेटिक रुप से संवर्धित फसलों का उपयोग अपनी ज़रुरतें पूरा करने के लिए भी किया जा सकता है. |
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