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स्तन कैंसर में आशा की किरण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं में स्तन कैंसर सिर्फ़ विटामिन डी की कमी से ही नहीं होता बल्कि इस पर भी निर्भर होता है कि उनका शरीर इस विटामिन को किस तरह से इस्तेमाल करता है. इससे पहले किए गए विभिन्न शोध के अनुसार विटामिन डी स्तन कैंसर से बचाता है और इसकी कमी से स्तन कैंसर का ख़तरा बढ़ सकता है. अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन डी को तोड़ने के लिए ज़रूरी जीन का एक ख़ास प्रकार होता है उनके अंदर स्तन कैंसर का ख़तरा दोगुना हो जाता है. डॉक्टर मिशेल गाए और उनकी टीम ने कई महिलाओं पर अध्ययन किया जिनमें से 398 महिलाएँ स्तन कैंसर की मरीज़ थीं और 427 महिलाओं को यह बीमारी नहीं थी. इन महिलाओं में शरीर में विटामिन डी को नियंत्रित करने वाले जीन यानी वीडीआर पर ख़ास ध्यान दिया गया. स्तन कैंसर कैंपेन और वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड ने एक शोध कराया जिसमें पाया गया कि जिन महिलाओं को स्तन कैंसर था उनमें एक ख़ास प्रकार का विडिआर जीन था. डॉक्टर गाए ने कहा, "जिन महिलाओं के परिवार में कभी किसी को कैंसर नहीं हुआ था, उन्हें कैंसर कैसे हुआ, अब इस रहस्य का पता लगाया जा सकेगा." शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार का वीडीआर जिन महिलाओं में होता है उनमें स्तन कैंसर ज़्यादा भयानक रूप ले सकता है. उनका कहना है कि इस नए शोध से चिकित्सकों को सही और बेहतर इलाज देने में मदद मिलेगी. हालाँकि ब्रेकथ्रू ब्रैस्ट कैंसर नाम के संगठन के ऐंटोनियो बुनिन का कहना है कि स्तन कैंसर से बचने के लिए विटामिन डी का क्या ठोस योगदान होगा, इसके लिए और शोध करने की ज़रूरत है. |
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