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एशियाई बच्चों में विटामिन-डी की कमी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का कहना है कि दो वर्ष से कम उम्र वाले सभी एशियाई बच्चों को विटामिन-डी की अतिरिक्त खुराक दी जानी चाहिए. पिछले दिनों कुछ वैज्ञानिकों ने एक हैल्थ केयर सेंटर में इस बारे में एक शोध किया जिसके बाद को इस नतीजे पर पहुँचे कि ख़ासतौर पर एशियाई देशों के बच्चों में इस विटामिन की कमी है. वैज्ञानिकों के दल ने यह भी सुझाया है कि इस विटामिन की कमी से होने वाली बीमारियों पर जो पैसा खर्च करना पड़ता है उससे कम में ही बच्चों को इस विटामिन की मात्रा दी जा सकती है. ऐसा करने से बच्चों को विटामिन-डी की कमी से होने वाली रिकेट्स जैसी बीमारियों से बचाया जा सके. वैसे तो सूरज की किरणें ही इस विटामिन का मुख्य स्रोत हैं पर कुछ तरह के भोजन से भी इस विटामिन की आपूर्ति की जा सकती है. यह भी बताया गया है कि काली त्वचा वाले लोगों के लिए इस विटामिन की कमी होना चिंता का एक बड़ा कारण है क्योंकि रंजकता बढ़ जाने के कारण इस तरह की त्वचा में सूरज की रोशनी से इस विटामिन को तैयार करने की क्षमता कम हो जाती है. इंग्लैंड स्थित इस हेल्थ केयर सेंटर में शोधकर्ताओं ने वहाँ वर्ष 1994 से 2005 के दौरान आए ऐसे बच्चों का अध्ययन किया विटामिन-डी की कमी का सामना कर रहे थे. इस दौरान उन्हें इस तरह के 14 बच्चे मिले जिनमें से 13 एशियाई मूल के थे. | इससे जुड़ी ख़बरें अब विटामिन ए वाला 'सुनहरा चावल'28 मार्च, 2005 | विज्ञान स्तन कैंसर में आशा की किरण08 अगस्त, 2004 | विज्ञान 'कैंसर से बचाती है सूर्य की रोशनी'21 नवंबर, 2003 | विज्ञान ज़्यादा विटामिन ख़तरनाक08 मई, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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