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कई गंभीर बीमारियों के जीन मिले | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों को दुनिया भर में आमतौर पर होने वाली कई गंभीर बीमारियों की जीन संरचना को समझने में सफलता मिल गई है. वेलकम ट्रस्ट ने एक बड़े शोध के तहत 17 हज़ार लोगों के ख़ून के नमूने लेकर उनका डीएनए का अध्ययन किया और जीन संरचनाओं में अंतर का पता लगाया है. शोध के दौरान वैज्ञानिकों को अवसाद यानी डिप्रेशन, हृदय रोग, रक्तचाप और जोड़ों के दर्द यानी ऑर्थराइटिस और सभी तरह के मधुमेह यानी डाइबिटीज़ के लिए जेनेटिक विविधता का पता चला है. इस शोध के परिणाम 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं और इसे चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय माना जा रहा है. इस अध्ययन के लिए वेलकम ट्रस्ट ने 90 लाख पाउँड के एक विशेष कोष की स्थापना की थी. इसके लिए दो हज़ार मरीज़ों और तीन हज़ार स्वस्थ्य लोगों के ख़ून के नमूने लिए गए थे. इन नमूनों के डीएनए का 50 प्रमुख शोध दलों ने अध्ययन किया. महत्पूर्ण पहचान इन शोध दलों ने पूरी जीन संरचना में हज़ारों परिवर्तनों को पहचाना. इन परिवर्तनों का दो सौ विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के दल ने अध्ययन किया और पाया कि इन जीनों में से कई तो जीन संरचना या जीनोम के हिस्से थे. जबकि पहले माना जाता था कि इनका संबंध बीमारियों से है. इसका पता चलने से होगा यह कि कुछ ख़ास तरह के जीनों का परिक्षण करने से ही पता चल जाएगा कि किसी व्यक्ति को जीवन में किस तरह की बीमारियाँ होने की आशंका है. सबसे दिलचस्प बात जो इस शोध से पता चली वह यह कि टाइप-1 के डायबिटीज़, क्रॉन्स डीसीज़ और पेट की एक तरह की बीमारी के लिए जीन में एक ही तरह की गड़बड़ी ज़िम्मेदार है. टाइप-1 डायबिटीज़ के लिए वैज्ञानिकों को जीन संरचना में ऐसी कई संरचनाएँ मिल गई हैं जो इस बीमारी का ख़तरा बढ़ाते हैं.
इस परियोजना के तहत मोटापे के लिए ज़िम्मेदार जीन, टाइप-2 डायबिटीज़ के लिए ज़िम्मेदार तीन जीन और हृदय रोग के लिए दोषी जीन की पहचान पहले ही की जा चुकी है. इस परियोजना के प्रमुख प्रोफ़ेसर पीटर डोनेली ने इस खोज को एक 'नई सुबह' कहा है. उनका कहना है, "जीनोम अपने आप में इतना विशाल होता है कि पहले हम किसी एक जगह की रोशनी डालकर देख पाते थे, लेकिन अब हम एक साथ कई जगह का अध्ययन कर सकते हैं, मानों हमारे पास रोशनी डालने के लिए पाँच लाख स्रोत हैं." वेलकम ट्रस्ट के निदेशक डा मार्क वॉलपोर्ट का कहना है कि इस पूरे शोध के परिणाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं जिससे कि पूरी दुनिया में जहाँ भी वैज्ञानिक इसका फ़ायदा उठाना चाहें, वे इसका उपयोग कर लें. | इससे जुड़ी ख़बरें स्तन कैंसर के जीन ढूँढ़ना अब आसान27 मई, 2007 | विज्ञान कैंसर के ‘जीन कोड’ का पता चला29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान बुढ़ापे में बहरेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार28 अगस्त, 2006 | विज्ञान जीन ही जीतता है लड़कियों का दिल भी17 जून, 2005 | विज्ञान एचआईवी प्रतिरोधी जीन का पता लगा11 जनवरी, 2005 | विज्ञान क्या आप 150 साल तक जीना चाहेंगे?23 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान धूम्रपान से जुड़ा जीन02 जुलाई, 2003 | विज्ञान जीन जगाए जीन सुलाए17 जून, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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