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बुढ़ापे में बहरेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नीदरलैंड के शोधकर्ताओं के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम होने या बहरेपन के लिए एक ख़ास जीन में खोट ज़िम्मेदार है. ब्रिटेन में 61 से 70 वर्ष की आयु के 37 फ़ीसदी और 71 से 80 साल की आयु के 60 फ़ीसदी लोगों में बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या पाई गई है. बहरेपन का पता लगाने के लिए एंटवर्प विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 40 से 80 वर्ष की आयु के 1200 लोगों पर शोध किया. अध्ययन से पता चला कि जिन लोगों के ‘केसीएनक्यू-4 जीन’ में तेजी से बदलाव हुए उनमें बढ़ती उम्र के साथ बहरेपन की समस्या आम थी. शोधकर्ताओं की टीम इस मामले में कुछ और अनुसंधान करना चाहती है. इस अध्ययन को वित्तीय मदद मुहैया कराने वाले संस्थान ‘रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर डेफ पीपुल’ का कहना है कि इससे इलाज़ में मदद मिलेगी. वैज्ञानिक यह पहले से ही जानते हैं कि ‘केसीएनक्यू-4’ में उत्परिवर्तन आनुवांशिक बहरेपन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. ऐसा छोटी उम्र में ही हो जाता है और इसका शोरगुल या पर्यावरण संबंधी कारणों से कोई लेना-देना नहीं है. शोधकर्ताओं को अध्ययन के दौरान पता चला कि जिन लोगों की सुनने की क्षमता कम हो गई थी उनके डीएनए में भी सामान्य रुप से सुनने वालों की तुलना में अंतर पाया गया. शोधकर्ता डॉ. राल्फ़ होम कहते हैं, “कई लोग इलाज़ की संभावना के बजाए ये मान लेते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ सुनने में परेशानी होती ही है. ताज़ा शोध से उम्मीद जगी है कि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी नहीं होगी." | इससे जुड़ी ख़बरें एक तिहाई चीन में 'तेज़ाबी वर्षा'27 अगस्त, 2006 | विज्ञान स्कीइंग से लौटे तो सुनने की क्षमता भी लौट आई..01 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान अप्रत्यक्ष धूम्रपान से आँख को ख़तरा21 दिसंबर, 2005 | विज्ञान 'एमपी3 प्लेयर से बहरेपन का ख़तरा'19 अगस्त, 2005 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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