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गूगलअर्थ पर अब आवाज़ भी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गूगलअर्थ काफ़ी लोकप्रिय वेबसाइट रही है, इस पर लोग सेटेलाइट की मदद से ऊपर से दुनिया का नज़ारा देखते हैं. अब लोग दुनिया के किसी एक जगह पर बैठकर न सिर्फ़ शहरों और सड़कों को न सिर्फ़ देख सकते हैं बल्कि वहाँ की आवाज़ भी सुन सकते हैं. कैलिफ़ोर्निया की एक कंपनी एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जिसकी मदद से लोग अलग-अलग स्थानों की रिकॉर्डेड आवाज़ सुन सकेंगे. वाइल्ड सेंकच्युरी नाम के इस सॉफ़्टवेयर में साढ़े तीन हज़ार घंटे से अधिक की ऑडियो रिकॉर्डिंग है जो दुनिया भर से जुटाई गई है. कैलिफ़ोर्निया की इस कंपनी की बातचीत गूगल के साथ चल रही है लेकिन अभी तक कोई पक्का समझौता नहीं हुआ है. वाइल्ड सेंकच्युरी के निदेशक बर्नी क्रूज़ कहते हैं, "एक तस्वीर से हज़ारों शब्दों में कही जाने वाली बात बयान कर देती है लेकिन एक आवाज़ हज़ारों तस्वीरों के बराबर होती है." क्रूज पिछले 40 वर्षों से दुनिया भर से आवाज़ें रिकॉर्ड करते रहे हैं, जिसमें जानवरों, जंगलों, शहरों, रेगिस्तानों, पहाड़ों और समुद्र के भीतर की आवाज़ें भी शामिल हैं. उनका कहना है कि यह दुनिया में आवाज़ की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है. क्रूज़ कहते हैं कि अगर आप एक ख़ास एरिया पर ज़ूम-इन करेंगे तो आपको वहाँ की आवाज़ सुनने का विकल्प मिलेगा जिस पर क्लिक करके आप वहाँ का साउंडट्रैक सुन सकते हैं. क्रूज़ को विश्वास है कि इससे लोगों को ज़्यादा मज़ा आएगा और गूगलअर्थ की लोकप्रियता और बढ़ेगी. 29 मई को इसका पहला प्रदर्शन अमरीका में सान होसे में होगा जब दो दर्ज़न से अधिक आवाज़ों को लोग तस्वीरों के साथ सुन सकेंगे, बाद में हज़ारों साउंडट्रैक जोड़े जाएँगे. उन्होंने कहा कि इसे समय के साथ और समृद्ध बनाया जा सकता है और तरह-तरह की आवाज़ें जोड़ी जा सकती हैं. बदलते समय के साथ बदलती आवाजों को अपडेट किए जाने की भी योजना है ताकि लोगों को पता चल सके कि अगर एक शहर की आबादी बढ़ रही है वहाँ की आवाज़ भी बदल जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें हॉलीवुड फ़िल्म का ईरान ने किया विरोध18 मार्च, 2007 | पत्रिका गूगल डबलक्लिक को ख़रीदेगी14 अप्रैल, 2007 | कारोबार अब गूगल का वेब कैलेंडर भी14 अप्रैल, 2006 | विज्ञान गूगल से जानकारियाँ सौंपने को कहा गया19 मार्च, 2006 | विज्ञान गूगल की महाभंडारण योजना09 मार्च, 2006 | विज्ञान गूगल ने अमरीकी सरकार को नकारा20 जनवरी, 2006 | विज्ञान चीन में गूगल की पूरी सेवा नहीं25 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना गूगल ने ऑनलाइन लाइब्रेरी का काम रोका13 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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