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रविवार, 18 मार्च, 2007 को 08:03 GMT तक के समाचार
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हॉलीवुड फ़िल्म का ईरान ने किया विरोध
फ़िल्म का एक दृश्य
विरोध करने वाले इसमें अमरीका का ईरान विरोधी एजेंडा देख रहे हैं.
अमरीका और कनाडा में बसे ईरानी समुदाय के लोग हॉलीवुड की फ़िल्म '300' को लेकर नाराज़ हैं.

कहा जा रहा है कि इस फ़िल्म में ईरान की प्राचीन सभ्यता और इसके इतिहास का ग़लत और ग़ैर ज़िम्मेदाराना तरीके से चित्रण किया गया है.

यह फ़िल्म हालाँकि अमरीका बॉक्स ऑफिस पर सफल रही है और पिछले कई फ़िल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

फ़िल्म इसी सप्ताह यूरोप के सिनेमाघरों में भी रीलीज़ होने जा रही है.

फ़िल्म की कहानी फ्रैंक मिलर के उपन्यास पर आधारित है जिसमें 480 ईसा पूर्व हुए थर्मोपिलई के युद्ध का वर्णन है.

कहा गया है कि इस युद्ध में किस तरह स्पार्टा की 300 सैनिकों की एक छोटी सी सेना ने तत्कालीन पर्सिया (आधुनिक ईरान) के आक्रमण का प्रतिरोध किया था.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह स्पार्टा के राजा ने इस तीन सौ सैनिकों की सेना के साथ ईरानी आक्रमणकारी ज़ेरेक्सेज़ और उसकी लाखों सैनिकों की ख़ूँख़ार सेना का मुँहतोड़ जवाब दिया था.

इस फ़िल्म ने दुनिया भर के ईरानियों का गुस्सा भड़का दिया है. ख़ास तौर पर उत्तर-अमेरिका में बसे ईरानियों के बीच इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

यूनेस्को से अपील

वे इसे अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा पर एक हमला मान रहे हैं.

ईरान की सरकार भी अब इस विरोध में शामिल हो गई है.

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को से अपील की है कि वह इस फ़िल्म की निंदा करे क्योंकि यह ईरान की संस्कृति और इसके इतिहास के लिए अपमानजनक है.

यूनेस्को के महानिदेशक को लिखे एक पत्र में ईरानी प्रतिनिधि मोहम्मद रेज़ा देहशेरी ने कहा है कि इस संस्था कि ज़िम्मेदारी है कि वह इस फ़िल्म की भर्त्सना करे.

 यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमरीका के कुछ ही पाठ्यक्रमों में विश्व इतिहास की जानकारी दी जाती है और यहाँ के आम लोगों को ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में गुमराह करना बहुत आसान है.
ओमिद मेमेरियन, ईरानी पत्रकार, ब्लॉगर

देहशेरी ने कहा कि यह फ़िल्म पश्चिमी और पूर्वी सभ्यताओं के बीच संघर्ष को जन्म दे सकता है.

ईरानी सरकार के उच्चाधिकारी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं. वे इसे ईरान के ख़िलाफ़ एक व्यापक अभियान के रूप में देख रहे हैं.

ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के सांस्कृतिक सलाहकार ज़वाद शमाक़दारी ने कहा कि यह ईरान के ‘ इतिहास के साथ खिलवाड़ और ईरान की सभ्यता का अपमान ’ है.

उन्होंने इस फ़िल्म को ईरान और इसके लोगों के ख़िलाफ़ एक ‘ मनौवैज्ञानिक युद्ध ’ की संज्ञा दी.

ईरान के एक राष्ट्रीय अख़बार अयंदेह-नो ने सुर्खी लगाई है- ‘ हॉलीवुड ने छेड़ा ईरानियों के ख़िलाफ़ जंग’.

फ़िल्म के निर्मता वार्नर ब्रदर्स का कहना है कि यह फ़िल्म एक काल्पनिक कहानी है जो मौटेतौर पर एक एतिहासिक घटना पर आधारित है.

कंपनी की ओर से ज़ारी एक बयान में कहा गया है कि उनकी यह फ़िल्म एक काल्पनिक कृति है और इसका उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना है. इसका उद्देश्य किसी जाति या संस्कृति को नीचा दिखाना या किसी तरह का राजनीतिक संदेश देना नहीं है.

ब्लॉग अभियान

फ़िल्म का विरोध करने के लिए ईरानी समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर इंटरनेट का भी सहारा ले रहे हैं जहाँ उन्होंने फारसी ब्लॉगों के ज़रिए इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया है.

ईरानी शासक ज़ेरेक्सिज़ का फ़िल्म में किया गया चित्रण
आलोचक कहते है कि यह प्राचीन फारसी सभ्यता का अपमान है.

अवार्ड जीत चुके ईरानी ब्लॉगर और पत्रकार ओमिद मेमेरियन ने कहा कि इस फ़िल्म में जिस तरह से ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है उससे वे काफ़ी चिंतित हैं.

मेमेरियन कहते हैं, “ यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमरीका के कुछ ही पाठ्यक्रमों में विश्व इतिहास की जानकारी दी जाती है और यहाँ के आम लोगों को ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में गुमराह करना बहुत आसान है. ”

कुछ ब्लॉगरों और टिप्पणीकारों ने इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ अभियान छेड़े जाने का इस आधार पर विरोध किया है कि इस फ़िल्म के विरोध से ज़्यादा बड़ी लड़ाईयाँ अभी लड़ी जानी हैं.

ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई की बढ़ रही आशंका इनमें से एक है.

टोरंटो में बसे पेंदार यूसूफ़ी नाम के एक ईरानी ब्लॉगर ने इंटरनेट पर एक अलग तरह का युद्ध छेड़ दिया है जिसे ‘ गूगल बॉम्बिंग ’ कहा जा रहा है.

यानी करीब़ छह सौ ईरानी ब्लॉगरों और वेबसाईटों ने यूसूफ़ी के वेबसाईट के साथ लिंक जोड़कर इस सर्च ईंजन को ही चकमा देने का प्रयास किया है कि यदि गूगल के ज़रिए लोग इस फ़िल्म के बारे में जानना चाहें तो इस फ़िल्म की जगह ईरानी सभ्यता और संस्कृति के बारे में जानकारियाँ पहले आ जाएँ.

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