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सोमवार, 14 जून, 2004 को 17:12 GMT तक के समाचार
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गर्लफ्रेंड को लेकर मचा भारी हंगामा

गर्लफ्रेंड
गर्लफ्रेंड को लेकर महिला संगठन भी नाराज़ हैं
दो समलैंगिक महिलाओं के आपसी संबंधों पर बनी ताज़ा फ़िल्म 'गर्लफ्रेंड' को लेकर भारी हंगामा खड़ा हो गया है.

मुंबई, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में हिंदूवादी संगठनों ने फ़िल्म के पोस्टर जला दिए और कई सिनेमा हॉलों में भारी तोड़फोड़ की.

मुंबई में शिव सेना ने फ़िल्म को भारतीय संस्कृति पर हमला बताते हुए इसका प्रदर्शन तत्काल रोकने की माँग की.

इस फ़िल्म से महिला संगठनों में भी नाराज़गी है जिनका कहना है कि यह फ़िल्म 'अश्लीलता और महिलाओं के अभद्र चित्रण' से भरी है.

भारी विरोध

शिव सेना की युवा शाखा के नेता यशवंत खिलेधर कहते हैं, "समलैंगिकता भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है, हमने फ़िल्म फ़ायर का भी विरोध किया था."

मेघना नायडू
मेघना नायडू ने हवस में मुख्य भूमिका की थी

समलैंगिकता के मुद्दे पर 1999 में रिलीज़ हुई दीपा मेहता की फ़िल्म फ़ायर को लेकर भी काफ़ी हंगामा मचा था और कई स्थानों पर उसका प्रदर्शन नहीं हो पाया था.

एक महिला संगठन फ़ोरम अगेंस्ट ऑप्रेशन ऑफ़ वीमेंन की तेजल शाह ने भी इस फ़िल्म पर गहरी आपत्ति उठाई है, उनका कहना है, "यह फ़िल्म अश्लील है और सिर्फ़ पुरूषों के विकृत मनोरंजन के लिए बनाई गई है. इससे समलैंगिकों के प्रति समाज का व्यवहार और बुरा हो सकता है."

फ़िल्म के निर्देशक करण राज़दान पहले भी सेक्स संबंधों पर एक फिल्म 'हवस' बना चुके हैं. राज़दान का कहना है कि उन्होंने समलैंगिकों पर नहीं बल्कि हालात के कारण लेस्बियन बने लोगों पर फ़िल्म बनाई है.

 समाज में समलैंगिकों का भी स्थान होना चाहिए और उन्हें भी आम इन्सान की तरह देखा जाना चाहिए, यही मेरा इरादा था
करण राज़दान, निर्देशक

राज़दान कहते हैं, "मेरा इरादा समलैंगिकों के समर्थन में फ़िल्म बनाने का नहीं था लेकिन इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है जो एक अच्छी बात है. समाज में समलैंगिकों का भी स्थान होना चाहिए और उन्हें भी आम इन्सान की तरह देखा जाना चाहिए, यही मेरा इरादा था."

लेकिन राज़दान की दलील से न तो महिला संगठन सहमत हैं और न ही शिव सेना जैसे हिंदूवादी संगठन.

महिला संगठनों ने फ़िल्म पर भोंडेपन और अश्लीलता का आरोप लगाते हुए कहा है कि निर्देशक ने इस विषय पर किसी तरह की संवेदनशीलता का परिचय नहीं दिया है.

फ़िल्म में इशा कोप्पीकर और अमृता राव ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं और फ़िल्म इन दोनों की गहरी दोस्ती से शुरू होती है जो अंत तक आते-आते समलैंगिक रिश्तों में बदल जाती है.

फ़िल्म के हीरो आशीष चौधरी हैं लेकिन फ़िल्म इन्हीं दो नायिकाओं के इर्द-गिर्द घूमती रहती है.

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