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मंगलवार, 04 अप्रैल, 2006 को 02:50 GMT तक के समाचार
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प्रतिरोपण के क्षेत्र में 'क्रांतिकारी कामयाबी'
प्रयोगशाला में वैज्ञानिक
अब दिल सहित अन्य अंगों को प्रयोगशाला में विकसित करने पर काम हो रहा है
अमरीका के वैज्ञानिकों ने मरीज़ों की कोशिकाओं से ही प्रयोगशाला में विकसित मूत्राशय को प्रतिरोपित करने में सफलता पाई है.

नॉर्थ कैरोलीना के वेक फ़ॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसे सात सफल मामलों का उल्लेख किया है. उनका दावा है कि कुछ मामलों में प्रतिरोपित अंगों ने वर्षों तक सफलतापूर्वक काम किया.

वैज्ञानिकों की इस सफलता का विवरण द लैंसेट के ऑनलाइन संस्करण में छपा है. इसे अंगों के प्रतिरोपण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है.

अब वैज्ञानिकों की टीम दिल और अन्य अंगों को इसी तकनीक के आधार पर प्रयोगशाला में विकसित करने पर काम कर रही है.

मूत्राशय संबंधी बीमारियों के कारण दबाव काफ़ी बढ़ जाता है और इससे गुर्दे की समस्या पैदा हो सकती है. आम तौर पर इन बीमारियों का इलाज सर्जरी के माध्यम से होता है लेकिन इससे कई तरह की जटिलता आ जाती है.

सर्जरी में छोटी आँत या पेट के एक हिस्से से उत्तकों का इस्तेमाल कर ख़राब हुए मूत्राशय को फिर से ठीक करने की कोशिश की जाती है.

समस्या

चूँकि आँत का काम होता है पोषक तत्त्वों का अवशोषण और मूत्राशय का काम होता है उत्सर्जन. इसलिए कई बार मरीज़ों को ऐसी सर्जरी के कारण अन्य तरह की समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है. मसलन कैंसर का ख़तरा और गुर्दे में पथरी.

 ख़राब उत्तकों और अंगों के प्रतिरोपण की हमारी योग्यता की दिशा में यह तो एक छोटा क़दम है. हम धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक काम करना चाहते थे ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि हमने सही दिशा में काम किया
शोधकर्ता डॉक्टर एंथोनी अटाला

नॉर्थ कैरोलीना स्थित वेक फ़ॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने कमज़ोर मूत्राशय वाले सात युवा मरीज़ों की पहचान की.

वैज्ञानिकों ने हर मरीज से मांसपेशी और विशेष मूत्राशय कोशिकाएँ निकाली और फिर मूत्राशय को प्रयोगशाला में विकसित किया. प्रयोगशाला में इसे विकसित करने में सात से आठ हफ़्ते लगे.

फिर इस विकसित मूत्राशय को मरीज़ों के मूत्राशय से जोड़ दिया गया. वैज्ञानिकों ने पाँच वर्षों तक इसकी प्रगति पर नज़र रखी. उन्होंने पाया कि बिना किसी समस्या के मूत्राशय के काम में सुधार हो रहा है.

इस सफलता से उत्साहित वैज्ञानिक अब दिल और अन्य अंगों और उत्तकों को प्रयोगशाला में विकसित करने पर काम कर रहे हैं.

प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर एंथोनी अटाला ने कहा, "ख़राब उत्तकों और अंगों के प्रतिरोपण करने की हमारी योग्यता की दिशा में यह तो एक छोटा क़दम है. हम धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक काम करना चाहते थे ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि हमने सही दिशा में काम किया."

अपनी प्रतिक्रिया में एडवांस्ड यूरोलॉजी इंस्टीच्यूट ऑफ़ इलिनोइस के डॉक्टर स्टीव चुंग ने इसे मील का पत्थर बताया है.

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