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गुरुवार, 01 दिसंबर, 2005 को 00:44 GMT तक के समाचार
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पहली बार हुआ चेहरे का प्रतिरोपण
चिकित्सक
उत्तरी फ़्रांस में महिला के चेहरे के आंशिक प्रतिरोपण के लिए हुए ऑपरेशन में कई घंटे लगे
चेहरे पर किसी और का चेहरा लगाने के फ़ॉर्मूले पर फ़िल्में तो कई बन चुकी हैं लेकिन ये कल्पना केवल सिनेमा के पर्दे तक ही सीमित हुआ करती थी.

पर फ़्रांस में चिकित्सकों ने जो किया है वह सिनेमा नही हक़ीक़त है.

फ्रांस में चिकित्सकों ने एक महिला के चेहरे का आंशिक प्रतिरोपण किया है जो दुनिया में इस तरह का पहला ऑपरेशन है.

ऑपरेशन में सामान्य अर्थों में कहा जाए तो एक महिला के चेहरे पर दूसरी महिला के चेहरे के हिस्से लगा दिए गए हैं.

हालाँकि चिकित्सकों ने कहा है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जिस महिला का इलाज किया गया उसका चेहरा दूसरी महिला की तरह लगने लगेगा.

उनका कहना है कि ये चेहरा दोनों महिलाओं के मिले-जुले चेहरे जैसा लगेगा.

चिकित्सकों ने बताया है कि ये महिला अपना नाम नहीं बताना चाहती है और ऑपरेशन के बाद उसका स्वास्थ्य काफ़ी अच्छा है.

ऑपरेशन

 समस्या ये है कि जिस व्यक्ति के चेहरे के अंश लगाए जाएँगे वो ऐसा होना चाहिए जिसकी धड़कनें चल रही हों
इयन हचिंसन,

उत्तरी फ़्रांस में वैलेन्सिएन्स नामक शहर में रहनेवाली जिस महिला के चेहरे का इलाज किया गया है उसकी उम्र 38 वर्ष है.

इस वर्ष मई में एक कुत्ते ने इस महिला की नाक, होंठ और ठोढ़ी को बुरी तरह से घायल कर दिया था.

इस कारण महिला को बोलने और खाना खाने में बेहद तकलीफ़ होती थी.

उत्तरी फ़्रांस के एमियन्स शहर में चिकित्सकों ने कहा कि महिला के घावों की चिकित्सा प्लास्टिक सर्जरी से संभव नहीं थी.

इसके बाद चिकित्सकों ने एक और महिला के चेहरे से उत्तक, नस और नाड़ियाँ लेकर दूसरी महिला के चेहरे पर प्रतिरोपित कर दीं.

जिस महिला के चेहरे से ये उत्तक आदि लिए गए वह दिमाग़ी तौर पर मृत घोषित की जा चुकी थी.

विज्ञान और मतभेद

फ़ेस ऑफ़ का पोस्टर
चेहरा बदलने की थीम पर आधारित फ़िल्म 'फ़ेस ऑफ़' काफ़ी चर्चित और हिट रही थी

तकनीकी तौर पर देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों से ऐसा प्रतिरोपण संभव था और अमरीका तथा ब्रिटेन में इस बारे में शोध जारी था.

विशेष रूप से जब चेहरे पर प्रतिरोपण की बात हो तो इसके लिए किसी और के ही चेहरे का अंश लगाना बेहतर होता क्योंकि इससे काफ़ी हद तक समानता बनाई रखी जा सकती थी.

इस क्षेत्र में काम करनेवाले चिकित्सकों का मत है कि इस सुविधा से कई लोगों को लाभ हो सकता है जैसे उन लोगों की सहायता की जा सकती है जिनका चेहरा जलने से ख़राब हो गया है.

लेकिन कुछ कारणों से इनपर काम आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था. किसी ने इस संबंध में नैतिकता के सवाल उठाए तो किसी ने उस रोगी की मनोदशा पर पड़ सकने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई जिसका चेहरा बदल जाएगा.

इन्हीं कुछ कारणों से ब्रिटेन में तकनीकी तौर पर समर्थ होने के बावजूद ब्रिटेन में चेहरे के प्रतिरोपण को मान्यता नहीं दी जा सकी.

लंदन स्थित चेहरे के ऑपरेशन पर शोध करनेवाली एक संस्था के मुख्य कार्यकारी इयन हचिंसन कहते हैं,"समस्या ये है कि जिस व्यक्ति के चेहरे के अंश लगाए जाएँगे वो ऐसा होना चाहिए जिसकी धड़कनें चल रही हों".

वो आगे कहते हैं,"मिसाल के तौर पर आपकी बहन गहन चिकित्सा कक्ष में है और आपको इससे पहले कि उसे जीवित रखनेवाली मशीन को बंद किया जाए, उसका चेहरा हटाने के लिए सहमति देनी होगी. और ऐसे में ये भी तो हो सकता है कि चेहरा हटाने के बाद भी उस व्यक्ति की साँसें चलती रहें".

वहीं लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स के चिकित्सक माइकल मार्ले ने फ़्रांस में ऑपरेशन करनेवाले चिकित्सा दल को शुभकामनाएँ दी हैं और उम्मीद जताई है कि इससे चेहरों की चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई प्रगति होगी.

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