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मानव क्लोनिंग के क्षेत्र में बड़ी सफलता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने व्यक्ति विशेष के शरीर के अनुरूप स्टेम कोशिका विकसित करने का दावा किया है. मानव क्लोनिंग के क्षेत्र में इसे एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. स्टेम कोशिकाएँ वैसी नई कोशिकाओं को कहा जाता है जिन्हें कि किसी भी प्रकार के ऊतकों के रूप में विकसित किया जा सकता है. कोरियाई वैज्ञानिकों ने 11 प्रकार की स्टेम कोशिकाओं के विकास में रोगियों के शरीर से जेनेटिक अवयव लेकर दूसरों के दिए हुए अंडाणुओं में मिलाया. वैज्ञानिकों के अनुसार इस विधि से तैयार कोशिकाओं को रोगी विशेष का शरीर अस्वीकार नहीं करेगा. माना जाता है कि इस विधि से मधुमेह जैसी बीमारियों का बख़ूबी इलाज किया जा सकेगा. कोरियाई वैज्ञानिकों ने विज्ञान पत्रिका 'साइंस' को बताया है कि उनकी इस सफलता के बावजूद अभी कई अवरोधों को पार किया जाना बाकी है. दूसरी ओर आलोचक क्लोनिंग की इस नई तकनीक को अनैतिक करार दे रहे हैं. विधि सोल नेशनल यूनवर्सिटी के अनुसंधान दल के साथ काम कर चुके अमरीकी वैज्ञानिक डॉ. गेराल्ड शैटेन ने बताया कि रोगी के शरीर से ली गई स्टेम कोशिकाओं में बीमारी के कुछ लक्षण मौजूद रहने की आशंका रहती है ऐसे में इनके उपयोग से पहले और उपचार की ज़रूरत होगी. कोरियाई वैज्ञानिकों ने रोगी के शरीर की त्वचा कोशिकाओं के आनुवंशिक तत्व डीएनए लेकर किसी अन्य द्वारा दिए गए अंडाणु में प्रतिरोपित किया गया. ऐसा करने से पहले अंडाणु के अपने आनुवंशिक तत्वों को निकाल दिया गया था. इसके छह दिनों के बाद यानी बिल्कुल शुरुआती चरण में विकसित हो रहे भ्रूण से वैज्ञानिकों ने स्टेम कोशिकाएँ निकालने में सफलता हासिल की. इन स्टेम कोशिकाओं की जाँच के बाद पाया गया इन्हें रोगी के शरीर द्वारा अस्वीकार करने की आशंका नहीं होगी. |
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