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गुरुवार, 25 अगस्त, 2005 को 14:30 GMT तक के समाचार
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फेफड़ों के प्रतिरोपण पर नई प्रगति
फेफड़ा
फेफड़ों के प्रत्यर्पण के लिए दान करनेवालों की कमी है
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने मानव में फेफड़ों के प्रतिरोपण की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम उठाया है.

लंदन के इंपीरियल कॉलेज की एक टीम ने मानव भ्रूण के स्टेम सेल या मूल कोशिकाओं को फेफड़ों में पाई जाने वाली कोषिकाओं की तरह विकसित किया है.

फेफड़ों की ये कोशिकाएँ ऑक्सीजन को रक्त में पहुँचाने में सहायक होतीं हैं.

इस टीम का कहना है कि बाद में इस तरह की कोशिकाओं को अस्थि मज्जा जैसे दूसरे स्रोतों से भी बनाया जाना संभव हो पाएगा.

इससे मानव भ्रूण के उत्तकों के इस्तेमाल को लेकर जो नैतिक चिंताएँ सामने आ रहीं हैं उनका भी समाधान हो पाएगा.

 हालाँकि प्रतिरोपण के लिए फेफड़े बनाने में अभी कुछ वर्षों का समय लग सकता है, लेकिन यह उन कोशिकाओं को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है जो क्षतिग्रस्त फेफड़ों को सुधारने में काम आ सकेंगीं
डॉक्टर ऐन बिशप

स्टेम सेल या मूल कोशिकाएँ ऐसी कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें शरीर में काम आने वाली कई दूसरी तरह की कोशिकाओं में भी विकसित किया जा सकता है.

वर्तमान में शरीर के विभिन्न अंगों को प्रत्यारोपित करके लोगों की जान बचाई जा रही है. लेकिन प्रतिरोपण के लिए अंगों की भारी कमी के कारण बहुत से लोग मौत के मुँह में चले जाते है.

इंपीरियल टीम ने फेफड़ों की जिन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में विकसित किया है वो फेफड़ों के उस भाग में काम आतीं हैं जहाँ ऑक्सीजन रक्त में मिलती है और कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकलती है.

डाक्टर ऐन बिशप और उनकी सहयोगियों की योजना अपनी इन खोजो से श्वसन संबधी उस बीमारी का इलाज करने की है जिसमें फेफड़े का यह भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है और जिसकी वजह से गंभीर रुप से बीमार कई मरीज़ मौत का शिकार हो जाते हैं.

आशा की किरण

 फेफड़ों के क्षतिग्रस्त हुए भाग को बदलना हमेशा से ही एक चुनौती भरा काम रहा है, और हो सकता है कि इन कोशिकाओं से कोई नई शुरुआत हो
प्रोफ़ेसर स्टीफ़न स्पीरो

इन कोशिकाओं का इस्तेमाल पूरे फेफड़े के प्रतिरोपण और फेफड़ों के क्षतिग्रस्त हुए भाग को ठीक करने के काम में भी किया जा सकेगा.

लेकिन अभी भी इस दिशा में काफी काम किया जाना बाक़ी है.

डॉक्टर बिशप का कहना है,"हालाँकि प्रतिरोपण के लिए फेफड़े बनाने में अभी कुछ वर्षों का समय लग सकता है, लेकिन यह उन कोशिकाओं को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है जो क्षतिग्रस्त फेफड़ों को सुधारने में काम आ सकेंगीं”.

ब्रिटिश लंग फाउंडेशन के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर स्टीफ़न स्पीरो का कहना है,"यह खोज बहुत ही आश्चर्यजनक है लेकिन अभी भी बहुत काम करना बाक़ी है."

उन्होंने कहा कि कई अन्य तरह की कोशिकाएं भी हैं जो फेफड़े बनाने में काम आतीं हैं, जिनसे नए अंग बनाए जा सकते है. लेकिन जिन कोशिकाओं को इंपीरीयल टीम ने विकसित किया है वो फेफड़ों के संचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.”

उन्होंने आगे कहा,"फेफड़ों के क्षतिग्रस्त हुए भाग को बदलना हमेशा से ही एक चुनौती भरा काम रहा है, और हो सकता है कि इन कोशिकाओं से कोई नई शुरुआत हो."

यह शोध कार्य चिकित्सा अनुसंधान परिषद की सहायता से किया गया है.

इंपीरियल शोधकर्ताओं की योजना अपनी इन खोजों का व्यापारिक इस्तेमाल करने की भी है.

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