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नीरस काम से दिल को ख़तरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में हुए एक अनुसंधान के अनुसार रुचिकर काम नहीं कर रहे लोगों को दिल के दौरे का ख़तरा बढ़ जाता है. यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि नीरस या उबाऊ काम दिल की धड़कन को तेज़ कर देता है. ऐसे लोगों के दिल की धड़कन बहुत कम परिवर्तनशील भी होती है. उल्लेखनीय है कि दिल की धड़कनों में उतार-चढ़ाव सेहत के लिए उपयुक्त माना जाता है. मसलन व्यायाम के दौरान दिल को तेज़ी से धड़कना पड़ता है ताकि माँसपेशियों में ज़्यादा ऑक्सीजन पहुँचाया जा सके. उसी तरह नींद के दौरान दिल को ज़्यादा तेज़ धड़कने की ज़रूरत नहीं होती है. इस अध्ययन में 2,000 से ज़्यादा सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया गया. अध्ययन में डॉ. हैरी हेमिंग्वे की टीम ने पाया गया कि छोटे-मोटे काम करने वाले या कम सामाजिक हैसियत वाले लोगों के दिल की धड़कन में ज़्यादा बदलाव नहीं देखा गया. ऐसे लोगों के दिल एक जैसी गति से धड़कते रहते हैं, जोकि दिल के दौरे के ख़तरे को बढ़ाता है. डॉ. हेमिंग्वे ने कहा कि दफ़्तर की परिस्थितियों में बदलाव कर इस ख़तरे को कम करना संभव हो सकता है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के प्रवक्ता एलिसन शॉ ने कहा कि पहले के अध्ययनों से ज़ाहिर है कि कि दिल की धड़कनों के कम परिवर्तनशील होने के पीछे डिप्रेशन या अवसाद भी एक बड़ा कारण हो सकता होता है. |
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