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मानव भ्रूण की क्लोनिंग को अनुमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में क्लोनिंग के ज़रिए बनी पहली भेड़ डॉली के निर्माता को मानव भ्रूण की क्लोनिंग की अनुमति मिली है. प्रोफेसर इयान विल्मट और लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिक मोटर न्यूरान बीमारी की जांच पड़ताल के लिए मानव भ्रूण की क्लोनिंग करेंगे. ऐसा दूसरी बार है जब ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्रयोलॉजी अथारिटी ने ऐसी अनुमति दी है. हालांकि आलोचकों का अभी भी कहना है कि मानव भ्रूण की क्लोनिंग अनैतिक है. लेकिन अन्य लोगों का कहना है कि इससे होने वाले फ़ायदों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. प्रोफेसर विल्मट का कहना है कि मानव भ्रूण की क्लोनिंग के ज़रिए मोटर न्यूरान बीमारी के बारे में बहुत जानकारियां जुटाई जा सकेंगी. ब्रिटेन में 2001 से ही शोध कार्य के लिए थेराप्युटिक क्लोनिंग की इजाज़त है लेकिन आधिकारिक रुप से इसकी अनुमति दूसरी बार ही दी गई है. इससे पहले वैज्ञानिक ख़राब उत्तकों को बदलने के लिए ही भ्रूणों की क्लोनिंग की अनुमति मांगते थे लेकिन प्रोफेसर विल्मट ऐसे लोगों के भ्रूणों की क्लोनिंग करना चाहते हैं जिनमें मोटर न्यूरॉन बीमारी पहले से है.
विल्मट यह देखना चाहते हैं कि यह बीमारी भ्रूण में कैसे बढ़ती है. क्लोन किए गए भ्रूण पर दवाईयों के परीक्षण भी किए जाएंगे. मोटर न्यूरान बीमारी मोटर नयूरान नामक कोशिकाओं के मरने से होती है. मोटर न्यूरान कोशिकाएं दिमाग और मेरुदंड को नियंत्रित करती है. मांसपेशियों की कमज़ोरी अकेले ब्रिटेन में ही मोटर न्यूरान बीमारी 5000 लोगों को है. इस बीमारी से ग्रसित आधे से अधिरक लोग बीमारी का पता चलने के 14 महीने में ही मर जाते हैं. इस बीमारी में चेहरे और गर्दन की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं जिससे बात करने, खाना खाने और निगलने में परेशानी होती है. विल्मट जानना चाहते हैं कि इस बीमारी में मोटर न्यूरान कोशिकाएं मरती क्यों हैं. हालांकि प्रोफेसर विल्मट की टीम ने पहले भी कहा है कि वो किसी भी तरह क्लोनिंग के ज़रिए नया मानव बनाने की योजना में नहीं हैं और परीक्षणों के बाद क्लोन किए गए भ्रूण को नष्ट कर दिया जाएगा. |
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