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इंडोनेशिया में अदभुत प्रजातियाँ मिलीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक दल का कहना है कि उन्होंने इंडोनेशिया के जंगलों में एक ऐसी "खोई हुई दुनिया" का पता लगाया है जहाँ पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की दर्जनों नई प्रजातियाँ हैं. इन वैज्ञानिकों ने मेंढकों की नई 20 प्रजातियाँ, तितली की चार नई प्रजातियाँ और ताड़ के पेड़ की कम से कम पाँच नई प्रजातियाँ खोजने का दावा किया है. लेकिन इन वैज्ञानिकों ने जो नई प्रजातियाँ खोजने का दावा किया है उनकी अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी है. जानवरों और पेड़ों की नई प्रजातियाँ खोजने वाले इस दल में अमरीका, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक शामिल हैं. उन्होंने इंडोनेशिया के पूर्वी पपुआ प्रांत में फोजा पहाड़ी इलाकों का सर्वेक्षण किया. वहाँ क़रीब बीस लाख एकड़ क्षेत्र में जंगल फैले हैं. इस वैज्ञानिक दल के सहनेता ब्रूस बीहलर ने बताया, "वहाँ सभ्यता के कोई निशान नज़र नहीं आते हैं, यहाँ तक ऐसा भी नहीं लगता कि वहाँ को सामुदायिक जीवन रहा होगा." बीहलर ने कहा कि यहाँ तक कि वैज्ञानिक दल के साथ जाने वाले दो स्थानीय क़बायली व्यक्ति भी उस इलाक़े को देखकर दंग रह गए. 'निडर' वैज्ञानिकों के इस दल ने जो खोज की है उसमें सबसे अदभुत शहद खाने वाली एक ऐसी चिड़िया है जिसके चेहरे पर उजले नारंगी रंग के धब्बे हैं. पिछले क़रीब साठ साल में उस इलाक़े में यह इस तरह की पहली चिड़िया है जो देखी गई है.
वैज्ञानिकों ने सुनहरे रंग का कंगारू भी खोजा है जिसके बारे में आशंका थी कि उस प्रजाति का इतना शिकार किया गया कि वह लगभग समाप्त हो गई. इस दल ने एक ऐसी चिड़िया की भी तस्वीरें ली हैं जिसे 19वीं सदी में शिकारियों ने 'स्वर्ग की चिड़िया' कहकर पुकारा था. ब्रूस बीहलर ने बताया कि वैज्ञानिक अपने सर्वेक्षण के दौरान जिन प्रजातियों के संपर्क में आए उनमें से कई तो इंसानों से बिल्कुल नहीं डरती हैं. लंबी चोंच वाला एक और अंडे देने वाला एक जानवर तो इतना निडर निकला कि उसे वैज्ञानिक उठाकर अपने कैंप में लाए और उसका वहाँ ख़ूब अध्ययन किया. दिसंबर 2005 में यह सर्वेक्षण अमरीकी संगठन कंज़रवेशन इंटरनेशनल ने इंडोनेशिया के विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर कराया था. वैज्ञानिकों के इस दल ने स्वीकार किया है कि तीन महीने की उनकी यात्रा के दौरान वह उस जंगल के पूरे इलाके को अच्छी तरह नहीं देख पाए. बीहलर ने कहा, "हम बहुत थोड़े से क्षेत्र में ही जा पाए. जो भी वहाँ जाएगा वह निश्चित रूप से कोई रहस्य खोलकर आएगा." | इससे जुड़ी ख़बरें 'गिद्ध बचाने के लिए जानवरों की दवा बदलें'31 जनवरी, 2006 | विज्ञान 'गैस उत्सर्जन के गंभीर परिणाम'30 जनवरी, 2006 | विज्ञान मॉरीशस में डोडो की हड्डियाँ मिली24 दिसंबर, 2005 | विज्ञान 800 प्रजातियों के लिए ख़तरे की घंटी13 दिसंबर, 2005 | विज्ञान स्तनपायी जानवरों की नई प्रजाति मिली06 दिसंबर, 2005 | विज्ञान पेरू से आया, दुनिया पर छाया04 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान गोरिल्लों ने अपनी बुद्धि का प्रदर्शन किया01 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान क्या अमरीका में घूमेंगे चीते, हाथी..?19 अगस्त, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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