| गोरिल्लों ने अपनी बुद्धि का प्रदर्शन किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों को पहली बार इस बात के सबूत मिले हैं कि गोरिल्लों में पानी की थाह लेने के लिए लाठी का उपयोग करने की क्षमता है. कोंगो के जंगलों में अध्ययन के दौरान वैज्ञानिको के एक दल ने पाया कि गोरिल्लों में छोटे-मोटे औज़ारों का उपयोग करने की क़ाबिलियत होती है. अभी तक यही माना जाता था कि ऐसी क्षमता चिंपाज़ी और ओरंगउटान जैसी वानर प्रजातियों में ही होती है. उल्लेखनीय है कि गोरिल्ला लुप्तप्राय जीव प्रजाति है और इस समय दुनिया भर में कुछ सौ गोरिल्लों ही बचे बताए जाते हैं. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कोंगो के नुआबेली-न्दोकी नेशनल पार्क में किए गए अध्ययन में शामिल वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशन सोसायटी के थॉमस ब्रेअर ने कहा, "हम गोरिल्लों पर पिछले 10 वर्षों से नज़र रख रहे थे. इस दौरान हमने दो बार गोरिल्लों को छोटे-मोटे औज़ारों का उपयोग करते पाया." उन्होंने बीबीसी को बताया, "पहले मामले में हमने पाया कि एक मादा गोरिल्ला एक तालाब को पार करने के लिए लकड़ी के डंडे का सहारा ले रही थी. वो डंडे से पानी की थाह लेने की कोशिश कर रही थी." ब्रेअर के अनुसार दूसरे मामले में एक अन्य मादा गोरिल्ला को पेड़ की सूखी टहनी के ज़रिए दलदली भूमि से खाने की चीज़ बटोरते पाया गया. गोरिल्लों के बारे में इस अध्ययन की रिपोर्ट ऑनलाइन पत्रिका पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ़ साइंस बॉयोलॉजी में प्रकाशित हुई है. |
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