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ओरंगउटान का वजूद ख़तरे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बदलते दौर में जिस तरह कुरकुरी ब्रेड और चिप्स वग़ैरा के साथ-साथ लिप्स्टिक और तरह-तरह के साबुनों की माँग बढ़ रही है, उसके साथ-साथ ओरंगउटान का वजूद भी ख़तरे में पड़ता जा रहा है. शोधकर्ताओं ने इसकी वजह बताई है कि पाम आयल यानी ताड़ के तेल के लिए बढ़ती मांग की वजह से उन जंगलों को नष्ट किया जा रहा है जिनमें ओरंगउटान बसते हैं. सिर्फ़ ब्रिटेन में ही हर साल इन उत्पादों में इस्तेमाल किए जाने वाले ताड़ तेल की क़रीब दस लाख टन मात्रा आयात की जाती है लेकिन पर्यावरणवादियों का कहना है कि ताड़ के तेल की बढ़ती माँग से उन जंगलों को ख़तरा पैदा हो गया है जहाँ ओरंगउटान बसते हैं. फ्रैंड्स ऑफ़ अर्थ ओरंगउटान के संरक्षण से जुड़े अन्य संगठनों ने आगाह करते हुए बताया है कि दक्षिण-पूर्वी एशिया में ओरंग-उटान की 90 प्रतिशत संख्या समाप्त हो चुकी है. उनके शोध में दावा किया गया है कि अगर यही हाल रहा तो 12 साल में ओरंगउटान का वजूद ही समाप्त हो जाएगा. वैधानिक कर्तव्य पर्यावरणवादी संगठनों ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सुपरमार्केट यह नहीं जानते कि उनके बहुत से उत्पादों में इस्तेमाल किया जाने वाला पाम ऑयल कहाँ से आता है. संगठनों ने सरकार से अनुरोध किया है कि कंपनी निदेशकों की यह वैधानिक ड्यूटी बनाई जाए कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके उत्पादों का पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े.
फ्रैंड्स ऑफ़ अर्थ संगठन के पाम ऑयल अभियानकर्ता एड मैथ्यू ने आरोप लगाया है कि सरकार ने ख़ुद अपने यहाँ ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की है. एड मैथ्यू ने कहा, "ब्रिटेन में 100 से ज़्यादा कंपनियाँ, यहाँ तक हर एक सुपरमार्केट ओरंग-उटान के वजूद को मिटाने में ईंधन का काम कर रहे हैं." 'कॉरपोरेट लालच' ऑयल फ़ॉर एप स्कैंडल नाम की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाम ऑयल के पेड़ लगाना मलेशिया और इंडोनेशिया में ओरंग-उटान की संख्या में कमी होने का प्रमुख कारण है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसके परिणास्वरूप हर साल क़रीब पाँच हज़ार ओरंग-उटान ख़त्म हो जाते हैं. शोध में दावा किया गया है कि ब्रिटेन की क़रीब 84 कंपनियाँ यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं कि पाम ऑयल विध्वंसकारी स्रोतों से न ख़रीदें. एप अलायंस संगठन के चेयरमैन इयन रैडमंड ने कहा कि अगर सरकार ठोस क़दम नहीं उठाती है तो "हमें अपने बच्चों को बताना पड़ेगा कि ओरंगउटान नाम का प्राणी इस धरती से कॉरपोरेट लालच और सरकार की राजनीतिक इच्छा की कमी की वजह से लुप्त हो गया." |
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