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इंसान और चिम्पांज़ी में फ़र्क! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिक अब तक यह तो जानते आए हैं कि इंसान और चिम्पांज़ी जाति में उत्पत्ति संबंधी बहुत कम ही अंतर रहा है या यूँ कहें कि इन दोनों जातियों में बहुत सी समानताएँ रही हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक ताज़ा शोध में नतीजा निकाला है कि इंसान और चिम्पांज़ी जाति के जीन आपस में 99 प्रतिशत समानता रखते हैं यानी दोनों में सिर्फ़ एक प्रतिशत असमानताएँ हैं. बोर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ़ एमआईटी एंड हारवर्ड के प्रोफ़ेसर एरिक लैंडर का कहना था कि इस शोध का अगला चरण यह पता लगाने की कोशिश होगा कि यह एक प्रतिशत असमानताएँ क्या है और ये कब पैदा हुई. इस शोध का दीर्घकालीन लक्ष्य यह पता लगाना है कि ऐसी क्या चीज़ है जिससे इंसान में जटिल भाषा का इस्तेमाल, दो पैरों पर सीधे चलना, मस्तिष्क का इस्तेमाल करने जैसे गुण आते हैं जो जानवरों में नहीं होते हैं. इस शोध में दोनों जातियों के अनुवंशिक कोड को पढ़ने में सफलता पाई है जिससे पहली बार ऐसा हो सकेगा कि दोनों जातियों की सीधे तौर पर आपस में तुलना की जा सकेगी. चिम्पांज़ी सीक्वेंसिंग एंड एनालिसिस कंसोर्टियम नाम के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने यह शोध किया है जो नेचर नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. शोध इस शोध में 67 वैज्ञानिकों ने 23 शोध संस्थानों में अपना काम किया और ये शोध संस्थान अमरीका, जर्मनी, इटली, इसराइल और स्पेन में थे. इस शोध में चिम्पांज़ी जाति के उत्पत्ति संबंधी विभिन्न तथ्यों को एक साथ पिरोकर देखने की कोशिश की गई है. इस शोध में ऐसे जैविक अंतर का पता लगाया गया है जो मानव जाति और चिम्पांज़ी के अलग होने के बाद पैदा हुआ था. ये दोनों जातियाँ क़रीब साठ लाख साल पहले एक दूसरे से अलग हुई बताई जाती हैं. संक्रमण से होने वाली बहुत सी ऐसी बीमारियों का चिम्पांज़ी जाति को कम ख़तरा होता है जो इंसानों को जल्दी हो जाती हैं. नेचर पत्रिका के एक वरिष्ठ संपादक डॉक्टर क्रिस गुंटर का कहना है कि इन दोनों जातियों के बीच जीन तुलना से चिकित्सा संबंधी फ़ायदे हो सकते हैं. इस शोध के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक रोबर्ट वाटरसन का कहना था कि चिम्पांज़ी इंसान के सबसे नज़दीकी रिश्तेदार जाति है. लेकिन अब भी बहुत से बुनियादी सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं. मसलन - ऐसा क्या है जो हमें इंसान बनाता है. अब नए शोध में जो अंतर पता चला है इससे चिम्पांज़ी और इंसान के बीच के बीच जैविक अंतर को समझने में मदद मिलेगी. |
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