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शुक्रवार, 19 अगस्त, 2005 को 16:47 GMT तक के समाचार
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क्या अमरीका में घूमेंगे चीते, हाथी..?
सिंह और हाथी
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जीवों से पारिस्थितक संतुलन बना रहेगा
नेचर पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कुछ अमरीकी शोधकर्ताओं की बात मान ली गई तो जल्दी ही उत्तरी अमरीका के कुछ हिस्सों में सिंह, चीते, हाथी और ऊँट घूमते नज़र आएगें.

‘प्लीइसटोसेने रि-वाइल्ड़िंग’ नाम की इस योजना को वन्य जीव सरंक्षण के प्रति एक नई सोच के रुप में देखा जा रहा है.

अमरीका के कॉर्नैल विश्विद्यालय के शोधकर्ताओँ का कहना है कि इस पहल से अफ्रीका के कम होते जा रहे जानवरों का संरक्षण तो होगा ही, साथ में नए रोज़गार पैदा करने में भी मदद मिलेगी.

उनका यह भी मानना है कि प्रमाण इस बात की ओर संकेत करते हैं कि बड़ी संख्या में जीव-जंतुओं के आने से पर्यावरण को बनाए रखने और जीव विविधता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

 अगर इसे एक घंटे में समझाया जाए तो उन्हें पता चलेगा कि इस बारे में लोगों ने इतना विचार नहीं किया है जितना कि हमने इस संबध में सोचा है. अभी तक जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या के लिए हमने अपनी आशाएँ अफ्रीकी उपमहाद्वीप से लगा रखी हैं
वैज्ञानिक हैरी ग्रीन

कॉर्नैल विश्विद्यालय में परिस्थिति विज्ञान और विकासवादी जीवविज्ञान के प्रोफेसर हैरी ग्रीन का कहना है, “यदि हमें अपनी योजना को समझाने के लिए सिर्फ़ दस मिनट का समय मिले तो लोग हमें पागल समझेंगें”.

लेकिन उनका मानना है कि “अगर इसे एक घंटे में समझाया जाए तो उन्हें पता चलेगा कि इस बारे में लोगों ने इतना विचार नहीं किया है जितना कि हमने इस संबध में सोचा है. अभी तक जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या के लिए हमने अपनी आशाएँ अफ्रीकी उपमहाद्वीप से लगा रखी हैं”.

अमरीकी जंगल

लगभग दस हज़ार से 18 लाख वर्ष पूर्व प्लीइसटोसेने युग के दौरान उत्तरी अमरीका में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु बड़ी संख्या में पाए जाते थे.

एक समय ऐसा भी था जब अमरीकी चीते दक्षिण-पश्चिमी अमरीका के रेतीले इलाकों में पाए जाने वाले प्रॉगंहार्न नामक हिरण और बंजर क्षेत्रों में पाए जाने वाले विशालकाय ऊँटों का शिकार करते थे.

लेकिन एक प्रचलित मत के अनुसार 13 हज़ार वर्ष पूर्व जब इस उपमहाद्वीप पर मानव जाति का आगमन हुआ, इनमें से अनेक जीव-जंतु विलुप्त हो गए.

 इस बारे में जनता की सहमति भी एक बड़ा मुद्दा होगी, विशेषरुप से तब जबकि आप परभक्षियों को लाने की बात कर रहें हों. इस संबध में नज़रिये में बदलाव की भी ज़रुरत होगी. यह समझना होगा कि परभक्षण एक प्राकृतिक तरीक़ा है और साथ ही लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी”.
डॉक्टर जॉश डैनलॉन

इन जीवों के विलुप्त होने का प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ा. उदाहरण के तौर पर प्रॉगंहार्न हिरण का शिकार करने वाले चीते अब विलुप्त हो चुके हैं और इन हिरणों की 60 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से ही उन शिकारी चीतों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन विलुप्त हो चुकी प्रजातियों के आज जीवित बचे समरुपों से पर्यावरण में आए ख़ालीपन को भरा जा सकता है. अफ्रीका के चीतों को ला कर प्रॉगंहार्न हिरणों से उनके पुराने संबधों को फिर से जीवित किया जा सकता है और इस तरह चीतों को भी एक नया प्राकृतिक आवास मिलेगा.

जन समर्थन

वर्तमान की जिन प्रजातियों से उत्तरी अमरीका के प्लीइसटोसेने काल को पुर्नजीवित किया जा सकता है उनमें घोड़े, जंगली गधे, दो कूबड़ों वाले ऊँट, एशियाई और अफ्रीकी हाथी व सिंह शामिल हैं.

कॉर्नैल विश्विद्यालय के डा. जॉश डॉनलान का मानना है कि “इस बारे में जनता की सहमति भी एक बड़ा मुद्दा होगी, विशेषरुप से तब जबकि आप परभक्षियों को लाने की बात कर रहें हों. इस संबध में नज़रिये में बदलाव की भी ज़रुरत होगी. यह समझना होगा कि परभक्षण एक प्राकृतिक तरीक़ा है और साथ ही लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी”.

हालांकि हो सकता है कि अमरीकी जनता अपने इन नए साथियों को सहन करने की बजाए उनका स्वागत ही करे.

डा. डॉनलान और उनके सहयोगियों के अनुसार जंगलों को पुनर्जीवित करने की योजना से पर्यावरण-पर्यटन और भूमि-प्रबंधन से संबधित रोज़गार बढ़ेंगे. इससे विशाल मैदानी इलाक़ों और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों की डगमगाती अर्थव्यवस्थाओं को भी सहारा मिलेगा.

डा. डॉनलान का कहना है कि ग़ैर सरकारी ज़मीन के बड़े इलाक़े इस योजना को लागू करने की सबसे उपयुक्त जगह हैं. इसमें हर क़दम सावधानी से उठाना होगा जिसमें जीवाश्मों के रिकार्ड और विशेषज्ञों व शोध की बड़ी भूमिका होगी.

उनका कहना है कि “हम हाथियों और चीतों को यहाँ ला कर छोड़ भर देने की वकालत नहीं कर रहे हैं बल्कि सबकुछ विज्ञान से प्रेरित होगा”.

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