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हाथियों पर जलवायु परिवर्तन का ख़तरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी, बाघ और गैंडे को शिकारियों से ज़्यादा जलवायु परिवर्तन से ख़तरा है. डॉक्टर रिचर्ड लीके ने बीबीसी को बताया कि पृथ्वी के तापमान के बढ़ने और जंगलों के कम होने के कारण जानवरों के विलुप्त होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है. उन्होंने इस पर चर्चा के लिए न्यूयॉर्क के निकट स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय में एक सेमिनार का आयोजन किया गया है. वो वन्यप्राणियों के लिए एक विशेष कोष बनाने का प्रयास करेंगे. हाथी, बाघ, शेर, और गैंडे को शिकारियों से बचाने के लिए लाखों डॉलर हर वर्ष खर्च किए जाते हैं. केन्या के वन्य जीवन सेवा के पूर्व निदेशक डॉक्टर लीके का मानना है कि यह पैसे की बर्बादी है. उन्होंने बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट को बताया,'' हम इन जीवों को शिकार होने से बचाने पर धन खर्च कर सकते हैं. लेकिन उसका क्या फ़ायदा यदि यह प्रजाति ही नहीं रहेगी.'' उनका कहना है कि ज्यादा बड़ा ख़तरा जलवायु परिवर्तन से है. पानी की कमी कंप्यूटर से किए गए आकलन के अनुसार अफ़्रीका के सूखे वाले हिस्सों में पानी की और कमी हो जाएगी. अफ़्रीका के जंगलों में बड़ी संख्या में पांच प्रजातियाँ पायी जाती हैं. इसमे हाथी, गैंडा, शेर, तेंदुआ और जंगली भैंसा शामिल है. औद्योगीकरण से पहले जानवर ऐसे स्थानों से पलायन कर गए थे लेकिन बढ़ती मानव जनसंख्या ने इस संभावना को समाप्त कर दिया है. डॉक्टर लीके का कहना है कि वन्यजीवों के लिए संरक्षित क्षेत्र एक टापू की तरह हैं और वन्यजीवन इसकी सीमाओं के अंदर है. उनका कहना है कि जैसी कि भविष्यवाणी की जा रही है कि इन क्षेत्रों में व्यापक जलवायु परिवर्तन से इन इलाक़ों के जंगल गायब हो सकते हैं. डॉक्टर लीके इस विषय को विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रतिनिधियों के समक्ष उठाने की योजना बना रहे हैं. |
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