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गुरुवार, 28 अप्रैल, 2005 को 12:02 GMT तक के समाचार
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हाथियों के उत्पात को रोकने के लिए करंट

हाथी
राजाजी नेशनल पार्क में हाथी समस्या बनते जा रहे हैं (फोटो सौजन्य: वन विभाग)
उत्तरांचल में उत्पात मचानेवाले जंगली हाथियों को रोकने के लिए करंट वाली बाड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

एशियाई हाथियों के सबसे बड़े वासस्थल राजाजी नेशनल पार्क के हाथी कई बार आसपास के गांवों में घुसकर भारी तबाही मचाते हैं.

राजाजी नेशनल पार्क करीब 825 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

यूं तो इसकी परिधि में बहुत सारे गांव हैं बसे हुए हैं और यहां तक कि कुछ गांव इसके अंदर भी हैं.

लेकिन हाथियों का सबसे ज्यादा कहर ऋषीकेश के क़रीब डोईवाला और लच्छीवाला इलाक़ों के 14 गांवों में है.

इन्हीं में से एक गांव के प्रधान प्रभुलाल बहुगुणा कहते हैं, '' हमारे तो जान के लाले पड़े हुए हैं. हाथी आते हैं और इतनी मेहनत से तैयार फसल को रातोंरात मटियामेट करके चले जाते हैं. अभी हाल ही में उन्होंने दो लोगों को भी घायल कर दिया.''

अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो पिछले बीस वर्षों में जंगली हाथियों ने 38 लोगों को मार डाला है और लाखों की संपत्ति को नुक़सान पंहुचाया है.

जंगली हाथियों से परेशान लोगों का गुस्सा अक्सर वन विभाग पर फूटता है.

इस मसले पर विधानसभा में भी सवाल उठा और लोगों ने अदालत की भी शरण ली लेकिन कोई कारगर हल नहीं ढूंढा जा सका.

राजाजी पार्क के निदेशक जीएस पांडे कहते हैं, '' हमारे ऊपर भारी दबाव है कि हाथियों को आबादी वाले हिस्से में जाने से रोका जा सके. पार्क का भूगोल ऐसा है कि कोई बाउंड्री बनाना असंभव है लिहाजा बिजली के तार लगाए जा रहे हैं.''

झटका

लगभग 55 किलोमीटर क्षेत्र में लगाई जा रही इस इलेक्ट्रिक फेंसिंग में बिजली सौर ऊर्जा से आएगी.

हाथी
इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाकर हाथियों की गतिविधियाँ सीमित करने की योजना है

इसमें 7 से 11 एंपियर तक का करंट होगा जिससे कि हाथियों को सिर्फ झटका लगेगा उनके शरीर को कोई नुक़सान नहीं पहुंचेगा.

लेकिन ये झटका इतना तेज और इतना पीड़दायक होगा कि अगली बार हाथी वहां जाने से डरेंगे.

लेकिन वन्य जीव विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कोई स्थाई हल नहीं है.

दरअसल हाथी और आदमी के बीच टकराव की ये समस्या बढ़ती जनसंख्या की वजह से पैदा हुई है.

हाथियों के वासस्थल घटते जा रहे हैं. पेड़ काटे जा रहे हैं. पानी के स्रोत कम होते जा रहे हैं तो जाहिर है कि भोजन और पानी की तलाश में हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में आएंगे ही.

देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्रयूट के प्रोफेसर एजेटी जॉन सिंह कहते हैं,'' इलेक्ट्रक फेंसिंग से डरकर संभव है कि हाथी उस जगह पर दोबारा न जाएं. लेकिन फिर वो दूसरे इलाकों की ओर मुंह कर सकते हैं, गुस्से में जंगल नष्ट कर सकते हैं. वास्तव में असली चुनौती तो उनके वासस्थल को बढ़ाने की है.''

हालांकि वन अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में यही एकमात्र कारगर उपाय है और हाथियों को बचाने के लिए भी ये ज़रूरी है.

इससे पहले 2003 में 'प्रोजेक्ट एलीफैंट' के तहत हरिद्वार वन प्रभाग में करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में बिजली के तार लगाए गए थे और वन अधिकारियों का दावा है कि उसके बाद से वहां हाथियों के उत्पात की घटनाओं में काफी कमी आई हैं.

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