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आवाज़ की नकल का उस्ताद हाथी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़मीन पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा जानवर हाथी नकल करने का उस्ताद है और ये जानवर कई बातें नकल कर के ही सीखता है. विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर में छपे एक शोध में शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ज़मीन पर पाए जाने वाले स्तनपायी जानवरों में मनुष्य के अलावा हाथी ही है जो किसी भी आवाज़ की नकल कर सकता है. वैज्ञानिकों को यह बात उस समय पता चली जब उन्होंने देखा कि सड़क के किनारे भटकता हुआ हाथी का एक बच्चा सड़क पर गुजरते ट्रकों की आवाज़ सुनकर उसकी पूरी नकल उतार रहा था. इस हाथी के बच्चे का नाम मलाइका रखा गया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में आवाज़ के ज़रिए हाथी एक दूसरे के साथ अपने संबंध और मज़बूत करते हैं. केन्या में हाथियों पर किए जा रहे शोध के प्रमुख जॉयस पूल कहते हैं " हाथी अपने समूह में एक दूसरे की आवाज़ की नकल करते रहते हैं और इसी से नकल की प्रवृत़्ति पनपती है." सामाजिक बंधन
आवाज़ की नकल का मामला मनुष्य के अलावा चिड़ियों और समुद्री जानवरों में भी देखा गया है. पूल का कहना है कि इसके ज़रिए जानवर एक दूसरे से अपने संबंधों को मज़बूत करते हैं. दूसरे शब्दों में आवाज़ के ज़रिए दो जानवर एक दूसरे के अधिक निकट आ पाते हैं और बदलते हुए हालात में एक दूसरे के अच्छे साथी बन पाते हैं. डा पूल कहते हैं " ऐसा हो सकता है कि मां और बेटी की आवाज़े एक जैसी हों और एक दूसरे को पहचानने का एक ज़रिया आवाज़ भी हो. " ऐसा पहले भी देखा जा चुका है कि हाथी अलग अलग आवाज़े निकालते हैं लेकिन मलाइका के मामले से पहले यह किसी को नहीं पता था कि हाथी आवाज़ की इतनी अच्छी नकल भी कर सकते हैं. मलाइका दस साल का है और केन्या में कई और अनाथ हाथी के बच्चों के साथ रहता है. नैरोबी मोम्बासा हाईवे पर अक्सर ट्रकें आती जाती रहती हैं जिसकी आवाज़ इन हाथियों के कानों में भी पड़ती हैं. वैज्ञानिकों ने इन हाथियों की आवाज़ों की रिकार्डिंग कर पूरी जांच की तो पाया कि ये आवाज़ें एक हद तक ट्रक की आवाज़ से मिलती जुलती थीं. शोध टीम के एक सदस्य पीटर त्याक कहते हैं " हमें जब ये परिणाम मिले तो मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई क्योंकि अब तक हम यही समझते थे कि सिर्फ मनुष्य और व्हेल मछलियां ही आवाज़ों की नकल करते है. " अनोखी क्षमता मलाइका के बाद शोधकर्ताओं ने इस दिशा में और काम करना शुरु किया और पाया कि कई और हाथी भी ऐसा करने में सक्षम हैं. अफ्रीका का 23 वर्षीय हाथी कालीमेरो ने अपना ज्यादा समय स्विटज़रलैंड के चिड़ियाघर में एशियाई हाथियों के साथ बिताया है जो एक अलग तरह की आवाज़ निकालते हैं. एशियाई हाथियों के साथ रहने के बाद कालीमेरो भी वैसी ही आवाज़ें निकालने लगा है. डा पूल कहते हैं कि ये देखना होगा कि क्या एशियाई हाथी अफ्रीकी हाथियों जैसी आवाज़ निकाल पाते हैं या नहीं. इस बारे में और शोध चल रहे हैं. |
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