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माइक पांडे को तीसरी बार ग्रीन ऑस्कर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वन्य जीवन पर वृत्तचित्र बनाने वाले माइक पांडे को तीसरी बार प्रतिष्ठित ग्रीन ऑस्कर सम्मान मिला है. माइक तीन बार ग्रीन ऑस्कर पाने वाले पहले एशियाई है. वाइल्ड स्क्रीन पांडा अवार्ड को ग्रीन ऑस्कर के नाम से ही जाना जाता है जो वन्य जीवन और पर्यावरण से जुड़ी फ़िल्में बनाने के लिए दो साल में एक बार दिया जाता है. लंदन में इन पुरस्कारों की घोषणा की गयी जहाँ माइक पांडे के अलावा दो और भारतीय फ़िल्मों को अलग-अलग वर्गों में पुरस्कार मिले. माइक पांडे की फ़िल्म " द वैनिसिंग जाएंट" को न्यूज़ वर्ग में यह सम्मान मिला उसके लिए 43 देशों से 400 फ़िल्मों के बीच प्रतिद्वंद्विता थी. माइक पांडे की यह फ़िल्म भारत में हाथियों के साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार पर आधारित है. बीबीसी से एक बातचीत में उन्होंने और जानकारी देते हुए कहा " भारत में विश्व के 60 प्रतिशत हाथी रहते हैं लेकिन इन पर कोई ध्यान नहीं देता. लोग इनके आवास स्थान यानी जंगलो को नष्ट कर रहे है. मैं अपनी फ़िल्म के ज़रिए हाथी की आवाज़ आम जनता तक पहुंचाना चाहता था." यह फ़िल्म पश्चिम बंगाल के मिदनापुर, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर और दक्षिणी भारत के कुछ इलाक़ों में शूट की गई. शूटिंग के दौरान आई समस्याओं के बारे में माइक ने कहा " एक बार हम धान के खेतों में हाथियों का पीछा कर रहे थे. भारी बारिश हो रही थी तभी पता चला कि हमारे पीछे भी हाथी है. हम लोग ग़ुस्साए हुए हाथियों से घिर गए थे और 11 किलोमीटर दौड़ कर जान बची." ग़ुस्सा पांडे को ग्रामीण लोगों के ग़ुस्से का भी सामना करना पड़ा. लेकिन शायद ग्रीन ऑस्कर ने मेहनत सार्थक कर दी.
माइक पांडे को इससे पहले 1994 में हाथियों पर ही बनायी गई एक अन्य फ़िल्म के लिए यह अवार्ड मिला था. इसके बाद उन्हे व्हेल शार्क पर एक फ़िल्म के लिए 2000 में दूसरा ग्रीन ऑस्कर मिला. इस बार दक्षिण भारत में हाथियों पर बनी एक अन्य फ़िल्म " द एटीन्थ एलीफैंट" को टीवीई वर्ग में ग्रीन ऑस्कर मिला जबकि अजय बेदी को अपनी फ़िल्म " द पोलिसिंग लंगूर" के लिए उभरती प्रतिभा का पुरस्कार दिया गया. पर्यावरण संरक्षण संबंधी विषयों पर फ़िल्मों के क्षेत्र मे भारत के बढ़ते प्रभाव की पश्चिमी मीडिया ने भी तारीफ़ की है. इस बारे में माइक कहते है " पहले माना जाता था कि सिर्फ अमरीका या पश्चिमी देश ही पर्यावरण संरक्षण पर फ़िल्म बना सकते है. हमने ये एकाधिकार तोड़ दिया है." माइक की फ़िल्म ने अपने वर्ग में रिचर्ड ब्रुक और एलन रुट जैसे दिग्गजों की फ़िल्मों से मुकाबला किया. एलन रुट को फ़िल्ममेकर्स फॉर कंज़रवेशन अवार्ड मिला. |
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