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800 प्रजातियों के लिए ख़तरे की घंटी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में उन स्थानों का विवरण तैयार किया है जहाँ दुर्लभ प्रजाति के जानवर और पेड़ पौधों के लुप्त होने का ख़तरा पैदा हो गया है. यह सूची पर्यावरणवादियों के एक दल ने तैयार की है जिसमें लगभग 800 प्रजातियों का विवरण है जिनके बारे में उनका कहना है कि अगर तुरंत उपाय नहीं किए गए तो ये प्रजातियाँ लुप्त हो सकती हैं. इन 800 प्रजातियों में से ज़्यादातर सिर्फ़ एक ही स्थान पर पाई जाती हैं और वो हैं उष्णकटिबंधीय क्षेत्र. राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में इन वैज्ञानिकों ने अपना शोध अध्ययन लिखा है जिसमें इनमें से कुछ स्थानों में इन प्रजातियों की संरक्षा के लिए उपाय करने पर एक हज़ार डॉलर प्रतिवर्ष तक का ख़र्च हो सकता है. इस शोधकर्ता दल के संयोजक स्टुअर्ट बुशर्ट ने बीबीसी से कहा, "इनमें से अधिकतर प्रजातियाँ एक-एक स्थान पर रहती हैं और उन पर मानव गतिविधियों का बहुत असर होने की संभावना है." "इन प्रजातियों की संरक्षा के लिए क़दम उठाना ही सिर्फ़ एक मात्र उपाय नहीं है बल्कि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो इनका लुप्त होना लगभग निश्चित है." यह अध्ययन पर्यावरण और वन्य जीव क्षेत्र के 13 जाने-माने संगठनों ने मिलकर किया है जिनमें लंदन की ज़ूलोजिकल सोसायटी, कंज़रवेशन इंटरनेशनल और अमेरिकन बर्ड कंज़रवेंसी भी शामिल हैं. इन संगठनों ने 'द अलायंस फ़ॉर ज़ीरो एक्सटिंशन' नाम के एक महासंघ के तहत यह अध्ययन किया है. इस अध्ययन में 595 ऐसे स्थानों का विवरण तैयार किया गया जहाँ कोई न कोई प्रजाति 'लुप्त होने के ख़तरे' में है. कुछ ऐसे भी स्थान हैं जहाँ एक से ज़्यादा ऐसी प्रजातियाँ हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हाथियों पर जलवायु परिवर्तन का ख़तरा07 मई, 2005 | विज्ञान भारत में गिद्धों को बचाने की कोशिश23 मार्च, 2005 | विज्ञान अंतरिक्षविज्ञानियों और खगोलविदों का साल23 दिसंबर, 2004 | विज्ञान हमारा पूर्वज साबित हो सकता है यह बंदर20 नवंबर, 2004 | विज्ञान 12 हज़ार प्रजातियों पर ख़तरा18 नवंबर, 2003 | विज्ञान गिद्धों के ग़ायब होने का ख़तरा 16 मई, 2003 | विज्ञान ठंडे प्रदेश की ओर पलायन02 जनवरी, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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