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'महामारी से 15 करोड़ लोगों पर ख़तरा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि एक नए तरह के इंफ़्लुएंज़ा के कारण एशिया में पचास लाख से लेकर पंद्रह करोड़ तक लोगों की जान जा सकती है. ये चेतावनी बर्ड फ़्लू बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल की ज़िम्मेदारी संभालनेवाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी डॉक्टर डेविड नबारो ने जारी की है. डॉक्टर नबारो ने कहा है कि ये महामारी किसी भी क्षण फैल सकती है और संभवतः यह बर्ड फ़्लू के वायरस के कारण शुरू होगी. ये वायरस इस तरह से म्यूटेट या उत्परिवर्तित हो रहे हैं जिससे ये नया इंफ़्लुएंज़ा बहुत जल्दी मनुष्यों में फैल सकता है. एशियाई देशों में बर्ड फ़्लू बीमारी 2003 से फैली और अभी भी इसका प्रभाव बना हुआ है. बीमारी के कारण काफ़ी बड़ी संख्या में पक्षियों, और विशेष रूप से आहार में प्रयोग होनेवाले पक्षियों की मौत हुई है. बर्ड फ़्लू ने 60 से अधिक इंसानों की भी जान ली है. लगभग 120 लोगों को ये बीमारी हुई थी. बचाव डॉक्टर नबारो ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि मुर्गी फ़ार्मों और ऐसे पक्षियों के बाज़ारों से संपर्क कर बीमारी को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही जंगली पक्षियों के प्रवास पर भी निगाह रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे किसी भी तरह के इंफ़्लुएंज़ा से होनेवाली मौतों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि बीमारी कहाँ शुरू हुई, कितनी जल्दी इसका पता लगा और वहाँ की सरकारों ने इस बारे में पता चलने पर क्या किया. डॉक्टर नबारो ने कहा कि मरनेवालों की संख्या 50 लाख से 15 करोड़ तक हो सकती है. उन्होंने कहा,"अगले कुछ महीनों में हमारे प्रयासों से ये पता लग सकेगा कि महामारी 50 लाख की दिशा में ले जाती है या 15 करोड़ की दिशा में". इस बीच शुक्रवार को फ़िलीपींस में 10 दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के कृषि मंत्रियों की एक बैठक हो रही है जिसमें बर्ड फ़्लू को रोकने के लिए तैयार एक योजना को स्वीकृति दी जानी है. |
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