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बर्ड फ़्लू से जुड़े सवालों के जवाब | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वी एशिया में फैली बीमारी बर्ड फ़्लू अब भारत तक जा पहुँची है. कई देशों में इस बीमारी ने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. इस बीमारी से जुड़े कुछ सवालों के जवाब- बर्ड फ़्लू के वायरस कितने तरह के होते हैं? इस रोग के वायरस 15 क़िस्म के हैं. जो वायरस इंसानों को अपना निशाना बना रहा है उसका नाम एच5 एन1 है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों का कहना है कि एच5 एन1 के जैसे वायरस इस बार दिखाई दे रहे हैं उस तरह के वायरस 1997 में नहीं देखे गए थे यानी पिछले सात वर्षों में उनमें बदलाव आया है. एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले पक्षी जैसे जंगली बत्तख़ें इस वायरस को अपने साथ ले जाती हैं लेकिन ख़ुद इसका शिकार नहीं होतीं. घरेलू पक्षियों जैसे मुर्ग़ियों को यह वायरस बड़ी आसानी से पकड़ लेता है. बर्ड फ़्लू इंसान को किस तरह शिकार बनाता है? पहले यही समझा जाता था कि बर्ड फ़्लू सिर्फ़ पक्षियों को होने वाली बीमारी है, लेकिन हाँगकाँग में पहली बार एक व्यक्ति में बर्ड फ़्लूके लक्षण 1997 में पाए गए. वैज्ञानिकों का मानना है कि वे लोग इस वायरस का शिकार हो सकते हैं जो मुर्गियों या कुछ अन्य पक्षियों के बहुत नज़दीक रहते हैं या काम करते है. लेकिन संक्रमण होता तभी है जब पक्षी संक्रमित और जीवित हो. पक्षियों की बीट में बर्ड फ़्लू के वायरस होते हैं जो हवा में उड़ने लगते हैं और साँस के रास्ते व्यक्ति के शरीर में घुस सकते हैं. बर्ड फ़्लूके सारे लक्षण किसी मामूली फ्लू की ही तरह होते हैं यानी गले में दर्द, खाँसी और ज़ुकाम. कुछ लोगों की आँखें भी सूज जाती हैं. जो 18 लोग 1997 में बर्ड फ़्लू के शिकार हुए वे सभी मुर्गी फार्मों में या बाज़ार में काम करते थे जहाँ उन्हें पक्षियों के बीच रहना पड़ता था. क्या बर्ड फ़्लू का कोई इलाज है? इसके रोगियों को वायरस रोधी दवाएँ जैसे टैमिफ़्लू दी जा सकती हैं. वैज्ञानिक इसे रोकने के लिए टीका बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. कितना ख़तरनाक है यह रोग? बर्ड फ़्लू के शिकार लोगों की जान बचाना कई बार मुश्किल होता है. 1997 में इस रोग के शिकार हुए 18 में से छह लोगों की मौत हो गई थी. इस बार भी अब तक कम से कम सात लोगों की मौत इस वायरस के कारण हो चुकी है. इस रोग की तुलना सार्स से की जा रही है लेकिन सार्स ने लगभग 800 लोगों की जान ली थी और लगभग साढ़े आठ हज़ार लोगों को निशाना बनाया था. बर्ड फ़्लू का संक्रमण उस तेज़ी से नहीं हो रहा जिस तरह का सार्स का हुआ था. क्या यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँच सकता है? आमतौर पर इंसानों ने यह वायरस पक्षियों के सम्पर्क से ही पकड़ा है, थाईलैंड में एक मामला आया था जिसमें इस वायरस से पीड़ित लड़की से उसकी मां को भी बर्ड फ़्लू हो गया था. दोनों की ही इस वायरस से मृत्यु हो गई. वियतनाम में दो बहनों ने यह वायरस अपने भाई से पकड़ा था. इससे बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि व्यक्ति उन जीवित मुर्गियों के संपर्क में न आए जिनके इस रोग से पीड़ित होने की आशंका हो. वैज्ञानिक इतने चिंतित क्यों हैं? ख़तरा ये है कि मुर्गियों में पाया जाने वाला वायरस इंसानों के वायरस से जुड़ जाए जिसकी वजह से एक नया वायरस पनप सकता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो बर्ड फ़्लू भी सार्स की तरह ख़तरनाक रूप ले लेगा. ऐसा होना कोई मुश्किल बात नहीं है, वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को पहले से इंसानों को होने वाला फ़्लू हो, और उसे बर्ड फ़्लू भी हो जाए तो, वायरस में बदलाव के बहुत आसार हैं. क्या मुर्गी का माँस खाना सुरक्षित है? हाँ. विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गी का माँस खाने में कोई ख़तरा नहीं है. इसके बावजूद कई देशों ने थाइलैंड और वियतनाम से मुर्गियों के माँस के आयात पर एहतियातन रोक लगा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गियों के माँस से रोग फैलने की कोई घटना नहीं हुई है, और ऐसा होने के आसार कम ही हैं. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि पूरी सावधानी बरतने के लिए मांस को 70 डिग्री सैल्सियस पर पकाना चाहिए और अंडो को भी पूरी तरह पका कर खाना चाहिए. संक्रमण को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है? हज़ारों मुर्गियों को मार डाला गया है ताकि संक्रमण न फैले. संक्रमण वाले देशों में ज़्यादातर मुर्गी फार्म बंद हो गए हैं लोगों सलाह दी जा रही है कि वे ज़िंदा मुर्गियों के नज़दीक न जाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें 'बर्ड फ़्लू' से मुर्गी व्यवसाय पर असर22 जनवरी, 2004 | पहला पन्ना बर्ड फ़्लू का हमला थाई लोगों पर23 जनवरी, 2004 | पहला पन्ना 'बर्ड फ़्लू' से थाईलैंड में पहली मौत26 जनवरी, 2004 | पहला पन्ना अब पाकिस्तान में भी 'बर्ड फ़्लू' 26 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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