|
मोबाइल फ़ोन और वायरस का ख़तरा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोबाइल फ़ोन से वायरस दूर करने वाला सॉफ़्टवेयर जल्दी ही दुकानों पर मिलना शुरु हो जाएगा. फ़िनलैंड़ की एक कंपनी एफ़-सिक्योर ने मोबाइल फ़ोन को प्रभावित करने वाले वायरस की बढ़ रही संख्या को देखते हुए यह सॉफ़्टवेयर बनाया है. हाल ही में हुए लाइव-8 संगीत समारोह और हेलसिंकी में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फ़ोन वायरस से प्रभावित हुए थे. कई विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ ही समय में मोबाइल फ़ोन में वायरस की समस्या उतनी ही गंभीर हो जाएगी जितनी इस समय कंप्यूटर से संबधित है. ब्रिटेन में एफ़-सिक्योर कंपनी के प्रबंधक रिचर्ड हॉल्स का कहना है कि हालाँकि मोबाइल फ़ोन सेवा देने वाली बहुत सी कंपनियाँ अपने नेटवर्क में वायरस को रोकने से संबधित सॉफ़्टवेयर लगाती हैं लेकिन एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन में वायरस को फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा के और प्रंबध किए जाने ज़रुरी हैं." समस्या हाल के महीनों में मोबाइल फ़ोन पर वायरस के हमले बढ़ गए हैं. काबिर और कॉमवारियर जैसे वायरस कई स्मार्ट मोबाइल फ़ोनों पर लगी छोटी दूरी की रेडियो प्रणाली ‘ब्लूटूथ’ द्वारा भी फैल सकते हैं. इस प्रणाली को हटा कर वायरस के हमले से बचा जा सकता है. कॉमवारियर वायरस संदेश भेजने की मल्टी-मीडिया व्यवस्था से भी फैलता है. मोबाइल फ़ोन को प्रभावित करने वाले अधिकांश वायरस उन फ़ोन पर हमला करते हैं जो सिंबियन प्रणाली से संचालित होते हैं. रिचर्ड हॉल्स का कहना है,"अभी तक केवल 10 प्रतिशत फ़ोन ही स्मार्ट फ़ोन की श्रेणी में आते हैं जो वायरस का शिकार बन सकते हैं. लेकिन उनका मानना है कि इस तरह के मोबाइल फोऩ की संख्या में निश्चित रुप से बढ़ोतरी होगी जिसके कारण बड़ी मात्रा में फ़ोन वायरस से प्रभावित होने लगेंगे." जर्मनी में हुए लाइव-8 कंसर्ट और हेलसिंकी में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान मोबाइल फ़ोन वायरस का फैलना इस बात का संकेत है कि जब बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं तो किस तरह से वायरस तेज़ी से हमले करते हैं. इससे पहले कई लोग वायरस को गंभीर समस्या के रुप में नहीं देख रहे थे, क्योंकि तब वायरस के प्रभाव पर सिर्फ़ प्रयोग ही चल रहे थे. चुनौती वायरस रोकने के लिए प्रोग्राम बनाने वाली कंपनी सिमांटेक के तकनीकी प्रबंधक ऑली व्हाईटहाउस का कहना है कि वायरस को रोकने वाले सॉफ़्टवेयर को जारी करने का यह बिल्कुल सही समय है. उन्होंने कहा,"हमें अब कम से कम यह पता चल गया है कि मोबाइल फ़ोन के सामने वायरस की चुनौती है." लेकिन ऑली वाईटहाउस का मानना है कि अभी भी ऐसी कई चीज़े हैं जो वायरस को फैलने को रोकती हैं.
वे कहते हैं कि उदाहरण के तौर पर मोबाइल फ़ोन के वायरस कंम्प्यूटर के वायरसों की तरह स्वतंत्र नहीं होते हैं. फिर भी उनका कहना है कि जैसे ही मोबाइल फ़ोन से दूसरे और कई काम लिए जाने लगेगें इन पर वायरस के हमले बढ़ जाएंगें. उन्होंने आगे कहा,"मोबाइल फ़ोन के लिए वायरस रोकने वाले सॉफ़्टवेयर बेहद ज़रुरी हैं क्योंकि मोबाइल फ़ोन में काम आने वाले सॉफ़्टवेयर को कंम्प्यूटर के साफ्टवेयर की तरह अपडेट नहीं किया जा सकता." कंम्प्यूटर में तो एक पैच शामिल करके उसे वायरस के हमले से बचाया जा सकता है लेकिन मोबाइल फ़ोन के मामलो में ऐसा करना मुश्किल है. रिचर्ड हॉल्स का मानना है,"आजकल लोग अपनी व्यक्तिगत जानकारियां मोबाइल फ़ोन में रखने लगे हैं और इन जानकारियों को वायरस के हमले से बचाना एक बड़ी चुनौती है." प्रयास कुछ कंपनियां पहले से ही मोबाइल फ़ोन के लिए सुरक्षा इंतज़ामों में लगी हैं. इस वर्ष मार्च में सिमांटेक कंपनी ने सिंबियन प्रणाली से संचालित होने वाले नोकिया मोबाइल फ़ोन के लिए वायरस रोकने वाला एक सॉफ़्टवेयर मुफ़्त में जारी किया था. लेकिन माना जा रहा है कि एफ़-सिक्योर पहली ऐसी कंपनी है जो बाज़ार में ऐसा सॉफ़्टवेयर ला रही है. एफ़-सिक्योर कंपनी का कहना है कि वायरस को रोकने वाला उसका सॉफ़्टवेयर 5 सितंबर से दुकानों में मिलने लगेगा. इसे ऑनलाइन भी ख़रीदा जा सकेगा. यह सॉफ़्टवेयर डाउनलोड की जाने वाली फाइल और मेमोरी कार्ड की जाँच करेगा और इस बात पर नज़र रखेगा कि कोई वायरस मोबाइल फ़ोन के पास भी फटकने न पाए. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||