BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 09 दिसंबर, 2004 को 13:39 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अब पूरी फ़िल्म मोबाइल पर भी

फ़िल्म का एक दृश्य
इससे पहले कुछ टेलीविजन धारावाहिकों के दृश्य मोबाइल पर जारी किए गए थे
अब आप तीन घंटे की हिंदी फ़िल्म अपने मोबाइल पर भी देख सकते हैं.

गुरुवार को नई बॉलीवुड फ़िल्म, रोक सको तो रोक लो पहली बार मोबाइल फ़ोन पर रिलीज़ की गई.

ये फ़िल्म सिनेमाघरों में शुक्रवार को लगी पर एक दिन पहले भारत के दस शहरों में दोपहर तीन बजे इस फ़िल्म का प्रीमियर मोबाइल फ़ोन पर हुआ.

मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों के लिए यह बहुत ही अनोखा तजुर्बा है क्योंकि दुनिया भर में ऐसा पहली बार हो रहा है.

इस फ़िल्म को एयरटेल मोबाइल फ़ोन सेवा इस्तेमाल करनेवाले ऐसे लोग देख सकते हैं, जिनके पास ऐज़ टेक्नोलॉजी है, जिसे एयरटेल लाइव भी कहा जाता है.

कंपनी में इस नई तकनीकी को इजात करने वाले मोहित भटनागर कहते हैं कि उनकी इस तकनीकी को लेकर बाजार में ख़ासा उत्साह बना हुआ है.

वो कहते हैं, "बाज़ार में तो ख़ासी माँग थी पर हमने इसे एक बार में दो सौ लोगों द्वारा देखे जाने तक ही सीमित किया है."

भटनागर के अनुसार, "भारत में संगीत, बॉलीवुड और क्रिकेट से संबंधित जो भी सेवाएँ शुरू होती हैं, वो सभी काफ़ी सफल होती है और सबसे ज़्यादा युवा पीढ़ी में उत्साह होता है.

फ़िल्म

शायद इसीलिए ऐसी फ़िल्म का चयन किया गया जिसकी कहानी युवा पीढ़ी के इर्द-गिर्द घूमती है और जिसमें भरपूर दोस्ती और रोमाँस का वादा है.

फ़िल्म के निर्देशक एक जाने-माने मैनेजमेंट गुरू हैं- अरिंदम चौधरी और उन्होंने शुरू से ही इस फ़िल्म में नए-नए प्रयोग किए हैं. इस फ़िल्म के नाम के चयन में मार्केट रिसर्च से लेकर इसकी लोकप्रियता में नई-नई मार्केटिंग तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है.

 मोबाइल फ़ोन कंपनियों की फ़ोन पर होने वाली बातचीत से होने वाली कमाई गिर रही है और सभी अपने ब्रांड को नए रूप में पेश करने के तरीके ढूँढ रहे हैं
सलीम मोभानी, उपाध्यक्ष, हंगामा एजेंसी

इस फ़िल्म को मोबाइल पर दिखाना, इसे नए रूप में पेश करने का ही एक तरीका है और यह तरकीब सोची हंगामा एजेंसी ने. कंपनी के उपाध्यक्ष सलीम मोभानी कहते हैं, "मोबाइल फ़ोन कंपनियों की फ़ोन पर होने वाली बातचीत से होने वाली कमाई गिर रही है और सभी अपने ब्रांड को नए रूप में पेश करने के तरीके ढूँढ रहे हैं."

वो बताते हैं, "ऑरेंज कंपनी ने टेलीविजन धारावाहिकों की दो-तीन मिनटों की क्लिप मोबाइल पर दिखानी शुरू कर दी है. ऐसे में उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी एयरटेल को एक कदम सोचना ही पड़ेगा और इसीलिए हमने उनसे कहा कि वो अपनी फ़ोन सेवा पर पूरी फ़िल्म ही लाइव दिखाएँ और वो भी रिलीज़ होने से पहले, इससे बाज़ार का पूरा खेल ही बदल जाएगा."

फिलहाल भारत में 15 अरब डॉलर की टेलीकॉम इंडस्ट्री हर साल 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और गुरूवार को हुए नए प्रयोग को विशेषज्ञ नए तकनीकी विकास के साथ-साथ दो उद्योगों के मेल के रूप में देख रहे हैं.

भटनागर कहते हैं, "भारत में बॉलीवुड फ़िल्मोद्योग बहुत ख़ास है और इससे जुड़ी तमाम सेवाएँ बहुत सफल रहती हैं. हम आगे भी इनके साथ मिलकर काम करेंगे."

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>