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शुक्रवार, 26 नवंबर, 2004 को 23:46 GMT तक के समाचार
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भाषा की लड़ाई में फँसी फ़िल्म वीर-ज़ारा
वीर ज़ारा
बंगलौर में वीर ज़ारा सिर्फ़ तीन सिनमाघरों में दिखाई जा रही है
बॉलीवुड की नई फ़िल्म वीर-ज़ारा को सिनमाघर में देखने का मौक़ा भारत ही नहीं बल्कि लंदन में भी लोगों को मिल रहा है.

मगर भारत में कर्नाटक की राजधानी बंगलौर के लोग यश चोपड़ा की इस नई फ़िल्म को नहीं देख पा रहे हैं.

कर्नाटक के स्थानीय फ़िल्म उद्योग ने सिनमाघरों में कन्नड़ के अलावा हिंदी, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं की फ़िल्में दिखाए जाने पर प्रतिबंध लगाया है. हालाँकि उनकी यह घोषणा आधिकारिक नहीं है.

उनका कहना है कि सिनमाघरों में सिर्फ़ कन्नड़ भाषा की फ़िल्में ही दिखाई जानी चाहिए.

ऐसे विरोध के समर्थक कुछ कट्टरपंथी संगठनों का तर्क है कि दूसरे राज्यों से आ रहे लोगों की वजह से ख़ुद कन्नड़ लोग अपने राज्य में ही अल्पसंख्यक बन सकते हैं.

सुप्रीम कॉर्ट ने इस प्रतिबंध को हटाए जाने का आदेश दिया है. मगर बंगलौर के सिनमाघर मालिकों को डर है कि अगर उन्होंने इस प्रतिबंध की अनदेखी की, तो परिणाम अच्छा नहीं होगा.

फ़िलहाल बंगलौर के 108 सिनमाघरों में से सिर्फ़ तीन सिनमाघरों में वीर-ज़ारा दिखाई जा रही है लेकिन कड़ी सुरक्षा घेरे में.

'सहनशीलता कहाँ'

बंगलौर को भारत का हाई-टेक शहर माना जाता है जहाँ दुनिया भर की मशहूर आईटी कंपनियों के दफ़्तर हैं.

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कन्नड़ फ़िल्म उद्योग से जुड़े लोग इस पाबंदी के समर्थन में हैं

बंगलौर स्थित आईटी कंपनियों में भारत के विभिन्न राज्यों से आए लोग काम करते है. उनका कहना है कि इस तरह की पाबंदियों से यही लगता है कि राज्य में सहनशीलता कम हो रही है.

1991 तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद के कारण बंगलौर में तमिलों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई थी जिसमें 20 लोग मारे गए थे.

इसके अलावा 2000 में कन्नड फ़िल्म स्टार राजकुमार का वीरप्पन द्वारा अपहरण किए जाने के बाद मिल चैनलों का प्रसारण एक महीने के लिए रोक दिया गया था.

एक सॉफ़्टवेर इंजीनियर सैमुएल का कहना है, "कन्नड़ के अलावा दूसरी भाषा की फ़िल्मों पर लगाए गए प्रतिबंध से शहर बदनाम हो रहा है."

कन्नड़ फ़िल्म निर्माता इस फ़ैसले को सही ठहराते हैं. उनका कहना है कि इस प्रतिबंध से ही स्थानीय फ़िल्म उद्योग को बचाया जा सकता है जो पहले ही कम दर्शकों और भारी घाटे की मार झेल रहा है.

 कन्नड़ के अलावा दूसरी भाषा की फ़िल्मों पर लगाए गए प्रतिबंध से शहर बदनाम हो रहा है
सॉफ़्टवेयर इंजीनियर सैमुएल

इन लोगों को कई कन्नड़ लेखकों का भी समर्थन हासिल है.

मशहूर कन्नड़ लेखक चंद्रशेखर कंबारा ने एक सिनमाघर के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा, “सभी को मिलकर कन्नड़ भाषा की रक्षा करनी होगी."

अगस्त से लागू हुए इस प्रतिबंध की वजह से फ़िल्म उद्योग को दो करोड़ डॉलर का नुक़सान हुआ है.

बॉलीवुड फ़िल्म उद्योग ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी इस प्रतिबंध को हटाने की अपील की है.

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