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'अलेक्जांडर' की कड़ी आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्कर अवार्ड विजेता निर्देशक ऑलिवर स्टोन की फ़िल्म 'अलेक्ज़ांडर' की अमरीका में कड़ी आलोचना हो रही है. न्यूयार्क टाइम्स लिखता है कि फ़िल्म कमज़ोर स्क्रीनप्ले, उलझे प्लाट और लचर अभिनय का मेल है. जबकि लॉस ऐंजेलिस टाइम्स का कहना है कि ऑलिवर स्टोन ने एक महान गाथा को बेहद साधारण और 'खोखले' तरीक़े से दिखाया है. 'अलेक्ज़ांडर' की उलझनें यहीं ख़त्म नहीं हुई हैं. 'अलेक्ज़ांडर द ग्रेट' या सिकंदर महान के अपने बचपन के दोस्त और सेनापति के साथ समलैंगिक संम्बधों को दिखाने को लेकर फ़िल्म विवादों से घिर गई है. ग्रीस के वक़ीलों ने तो इस पर क़ानूनी कार्रवाई की धमकी भी दे डाली है.
लेकिन उपन्यासकार गोर विडाल ने फ़िल्म का बचाव करते हुए कहा है, 'समलैंगिकता को खुले तौर पर सामने रखकर इस फ़िल्म ने एक तरह से नया रास्ता खोला है.' उन्होंने हॉलिवुड की फ़िल्मों में वर्जित माने जाने वाले समलैंगिकता के मुद्दे को दिखाए जाने की प्रशंसा की है. लगभग छह अरब रुपए की लागत से बनी इस फ़िल्म में कॉलिन फार्रेल ने मेसेडोनिया के महान योद्धा अलेक्जेंडर ( सिकंदर )का रोल निभाया है. अधिकतर आलोचकों ने सिर्फ़ लड़ाई के सीन और फ़िल्म की ऐतिहासिक परिकल्पना की तारीफ़ की है. एक फ़िल्मी पत्रिका वैराईटी का मानना है कि रुपहले पर्दे पर पहले कभी न दिखाए गए चौंका देने वाले ऐतिहासिक दृश्य लम्बे समय तक लोगों के दिमाग में ताज़ा रहेंगें. लेकिन समालोचक टॉड मैकार्थी का कहना है, "तीन घंटे का अधिकतर समय आपस के पेचीदा संम्बधों और सीमा विस्तार के राजनीतिक मुद्दों में ही निकल जाता है जिनमें दर्शकों की कोई ख़ास रुचि नहीं होगी." लॉस ऐंजेलिस टाइम्स के समीक्षक का कहना है कि इस नीरस और उबाऊ कोशिश में कुछ भी नया नहीं है. फ़िल्मी पत्रिका रोलिंग स्टोन सवाल उठाती है- अलेक्जेंडर कैसी है? और उसीमें जवाब है, महान तो कतई नहीं. |
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