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'बच्चों को मोबाइल फ़ोन से दूर रखें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों को मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है. वैज्ञानिक सर विलियम स्टुअर्ट ने एक अध्ययन के बाद कहा है कि हालाँकि अभी तक मोबाइल फ़ोन से स्वास्थ्य पर ग़लत प्रभाव पड़ने के कोई पुख़्ता सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन फिर भी बचाव के उपाय करने में कोई हर्ज़ नहीं है. उनके मुताब़िक आठ वर्ष की उम्र से कम बच्चों को मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इस अध्ययन के बाद ब्रिटेन की एक कंपनी ने इस उम्र के बच्चों के लिए तैयार किया गया अपना मोबाइल बाज़ार से वापस ले लिया है. पाँच महीने पहले ही चार से आठ साल के बच्चों के लिए मीमो फ़ोन को बाज़ार में उतारा गया था. इस कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर कम्युनिक8 का कहना है, "हालाँकि हमारा मानना है कि अगर इस उत्पाद को अभिभावकों की देखरेख में इस्तेमाल किया जाए तो ये पूरी तरह सुरक्षित है, सलाह अनदेखी ब्रिटेन के नेशनल रेडियोलॉजिकल प्रोटेक्शन बोर्ड में काम कर रहे सर विलियम ने पाँच साल पहले भी ये चेतावनी दी थी कि छोटे बच्चों को मोबाइल फ़ोन एमरजेंसी में ही इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन उनका मानना है कि उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया. मोबाइल ऑपरेटरों ने इस बात का स्वागत किया था कि उनकी रिपोर्ट में इसके ख़िलाफ कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. आज पश्चिमी देशों में हर चार में से एक बच्चा जो सात से दस साल की उम्र का है, मौबाइल फ़ोन इस्तेमाल करता है. ये 2001 के आंकड़ों से दोगुना है. सर विलियम ने बीबीसी को बताया कि हालाँकि मोबाइल फ़ोन के स्वास्थ्य पर बुरे असर पर कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन कई अध्ययनों ने इसपर गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री रोज़ी विन्टरटन का कहना है, "इसमें कोई शक नहीं कि अभिभावक बच्चों को सुरक्षा कारणों से मोबाइल फोन देते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का ख़्याल रखना होगा कि बच्चे उसका ज़्यादा इस्तेमाल न करें." मतभेद पहली स्टुअर्ट रिपोर्ट आने के बाद से ही विशेषज्ञों में मोबाइल फ़ोन से जुड़े ख़तरों को लेकर मतभेद हैं. पिछले साल स्वीडन के केरोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने 750 लोगों पर अध्ययन के बाद ये दावा किया था कि 10 साल से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने से कान का ट्यूमर होने की संभावना चार गुना बढ़ जाती है. एक डच रिसर्च में भी ये तथ्य सामने आए थे कि मोबाइल फ़ोन से दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है. इसके अलावा यूरोप में हुई एक रिसर्च में बताया गया था कि मोबाइल के इस्तेमाल से डीएनए को भी नुकसान हो सकता है. लेकिन कैंट यूनिवर्सिटी के डॉ एडम बर्गीस ने एक साल पहले एक रिसर्च के बाद इन सभी दावों का खंडन करते हुए कहा था कि मोबाइल फ़ोन से स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता. "जहाँ तक मेरा मानना है मोबाइल फ़ोन एकदम सुरक्षित हैं. हो सकता है कि भविष्य में कभी इसके कोई ख़तरे नज़र आयें, लेकिन हमें उसे भी इससे मिलने वाले फायदों के साथ तोलना होगा." |
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