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भारत में मोबाइल फ़ोन का बोलबाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मोबाइल फ़ोन का जादू सर चढ़कर बोला है और इन्हें इस्तेमाल करने वालों की संख्या घरों या दफ़्तरों में लगे लैंडलाइन फ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या को पार कर गई है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा है कि मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या पिछले महीने 14 लाख से बढ़कर चार करोड़ 49 लाख हो गई है. यह बढ़ोत्तरी मोबाइल फ़ोन के शुल्क में भारी कमी होने की बदौलत हुई है. ट्राई ने मंगलवार को दिल्ली में कहा, "मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या में इतनी बढ़ोत्तरी इसलिए हुई है कि भारत में मोबाइल फ़ोन से कॉल करने का शुल्क दुनिया में सबसे कम है." कई विकासशील देशों में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि हुई है और बहुत से लोग सरकारी क्षेत्र की लैंडलाइनों को छोड़कर मोबाइल फ़ोन अपना रहे हैं जो सस्ते भी हैं. हालाँकि अब भी एक सच्चाई ये है कि भारत में 100 में पाँच से भी कम लोग मोबाइल फ़ोन रखते हैं जबकि यूरोप के ज़्यादातर देशों में पचास प्रतिशत से ज़्यादा लोगों के पास मोबाइल फ़ोन होते हैं. बढ़ोत्तरी भारतीय संचार मंत्रालय ने इस साल जुलाई में कहा था कि एक दशक पहले तक देश की कुल जनसंख्या के छह प्रतिशत लोग फ़ोन का इस्तेमाल करते थे जो कि अब बढ़कर सात फ़ीसदी हो चुके हैं. अधिकारियों के अनुसार इस बढ़ोत्तरी की वजह मोबाइल फ़ोन का बढ़ता चलन है. भारत में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल अब रिक्शा चालक से लेकर घरों में काम करने वाले नौकर तक कर रहे हैं और यही इसके नए धारक बने हैं. अधिकारियों का कहना है कि कुल टेलीफ़ोन धारकों में मोबाइल रखने वालों की संख्या लगभग 45 प्रतिशत तक है. भारत में मोबाइल फ़ोन के क्षेत्र में 39 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि हो रही है. हर महीने लगभग 15 लाख भारतीय मोबाइल फ़ोन धारक बन रहे हैं और यही वजह है कि कई मोबाइल कंपनियों ने भारत का रुख़ किया है. |
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