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हचिसन ख़रीदना चाहता है एयरसेल को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मोबाइल फोन सेवा देने वाली कंपनी हचिसन एस्सार और हांगकांग की कंपनी हचिसन वैम्पोआ के बीच दक्षिण भारत की कंपनी एयरसेल को ख़रीदने के लिए बात चल रही है. यदि यह सौदा हो जाता है तो यह भारत की बिखरे हुए मोबाइल बाज़ार का सबसे बड़ा सौदा होगा. भारतीय अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार यह सौदा 36.20 करोड़ डॉलर यानी कोई 1800 करोड़ रुपए का हो सकता है. हालांकि कुछ अख़बारों ने इस सौदे को इसकी तुलना में बहुत कम का आंका है. एयरसेल के पास दस लाख मोबाइल ग्राहक हैं. भारतीय बाज़ार में जिस तरह की प्रतिस्पर्धा है उसके चलते छोटी कंपनियों पर दबाव है कि वे बड़ी कंपनियों को अपनी कंपनी बेच दें. एयरसेल तमिलनाडु में काम कर रही है और भारत की 12 कंपनियों में उसका नंबर आठवाँ है. इसकी तुलना में हचिसन एस्सार बहुत बड़ी कंपनी है और उसके ग्राहकों की संख्या 50 लाख है. भारत के बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार का कहना है कि दोनों कंपनियों के बीच सौदा हो चुका है. लेकिन दोनों कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि अभी सौदे पर बातचीत चल रही है. भारत में पिछले छह महीने में पाँच कंपनियों का विलय या बिक्री हो चुकी है. फ़िलहाल भारत में 3.60 करोड़ मोबाइल के ग्राहक हैं लेकिन 2005 तक उनकी संख्या बढ़कर 10 करोड़ हो जाने की संभावना है. |
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