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लैंडलाइन से ज़्यादा होंगे मोबाइल फ़ोन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस साल के अंत तक भारत में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या घरों या दफ़्तरों में लगे फ़ोन का इस्तेमाल करने वालों से बढ़ जाएगी. ये आकलन है भारत के संचार मंत्रालय का. मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि एक दशक पहले तक देश की कुल जनसंख्या के छह प्रतिशत लोग फ़ोन का इस्तेमाल करते थे जो कि अब बढ़कर सात फ़ीसदी हो चुके हैं. अधिकारियों के अनुसार इस बढ़ोत्तरी की वजह मोबाइल फ़ोन का बढ़ता चलन है. वैसे भारत में ही नहीं दुनिया भर में लोग घरों या दफ़्तरों पर लगे फ़ोन की बजाए मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं. भारत में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल अब रिक्शा चालक से लेकर घरों में काम करने वाले नौकर तक कर रहे हैं और यही इसके नए धारक बने हैं. अधिकारियों का कहना है कि कुल टेलीफ़ोन धारकों में मोबाइल रखने वालों की संख्या लगभग 45 प्रतिशत तक है. उनका कहना है, "उम्मीद है कि इस साल के अंत तक मोबाइल फ़ोन की संख्या फ़िक्स्ड फ़ोन से अधिक हो जाएगी." भारत में मोबाइल फ़ोन के क्षेत्र में 39 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि हो रही है. देश में मोबाइल फ़ोन की दरें भी काफ़ी कम हुई हैं और ये दुनिया की सबसे सस्ती दरों में से है. हर महीने लगभग 15 लाख भारतीय मोबाइल फ़ोन धारक बन रहे हैं और यही वजह है कि कई मोबाइल कंपनियों ने भारत का रुख़ किया है. |
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