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रविवार, 19 दिसंबर, 2004 को 16:06 GMT तक के समाचार
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ऑफ़-साइड के फ़ैसले का चक्कर
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वैज्ञानिकों ने माना कि रेफ़री का काम आसान नहीं
किसी रोमांचक फुटबॉल मैच के दौरान खिलाड़ी के ऑफ़-साइड होने के बावजूद अगर रेफ़री गोल का निर्णय दे दे, तो आप उसे रेफ़री की ग़लती मत मान लीजिएगा.

स्पेन के एक डाक्टर का कहना है कि यह रेफ़री का नहीं उसकी आँखों का दोष है.

डा. फ्रांसिसको बेल्दा मारुऐंदा का कहना है कि ऑफ़-साइड के नियम को सही ढंग लागू करने के लिए ज़रुरी सभी सूचनाओं का ठीक-ठीक विश्लेषण करने में आँखें सक्षम नहीं है.

ब्रिर्टिश मेडिकल जर्नल में छपे एक लेख में उनका कहना है कि ऑफ़-साइड के नियम को सही तरीक़े से लागू करने के लिए रेफ़री का एक साथ पाँच गतिशील चीज़ो पर ध्यान रखना ज़रुरी होता है.

इसलिए उनका मानना है कि रेफ़री को तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए.

ऑफ़-साइड के नियम के अनुसार जब गेंद गोल की तरफ बढ़ाई जाती है तो गोल पर हमला करने वाले खिलाड़ी के बराबर या गोल और हमलावर खिलाड़ी के बीच में कम से कम दो विपक्षी खिलाड़ियों का होना ज़रुरी होता है.

डा. मारुऐंदा का कहना है कि इसका मतलब यह हुआ कि ऑफ़-साइड के नियम का ध्यान रखने के लिए रेफ़री या उसके सहायक को गोल का प्रयास कर रही टीम के दो खिलाड़ियों, बचाव कर रही टीम के दो खिलाड़ियों और फुटबॉल, यानि एक साथ पाँच जगह नज़र रखनी होती है.

स्पेन के इस डाक्टर का कहना है कि इतनी जगह एक साथ नज़र रखना आँखों के बस की बात नहीं है. चार भागते हुए खिलाड़ियों और फुटबॉल पर रेफ़री एक साथ नज़र नहीं रख सकता, इसलिये रेफ़री से चूक होना स्वभाविक है.

तकनीकी सहायता

उनका कहना है कि इस तरह की चूक को रोकने का एकमात्र तरीक़ा खेल के दौरान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है. इसके लिए दृश्य को स्थिर कर देने वाले टेलीविज़न और फ्रेम दर फ्रेम दृश्य का विश्लेषण करना आवश्यक है.

एक प्रतिष्ठित पूर्व रेफ़री जैफ विंटर ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि ऐसा संभव है कि डाक्टर द्वारा की गई खोज सही हो.

हालांकि उनका मानना था कि इस बात को स्वीकार करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है कि रेफ़री द्वारा की जाने वाली ग़लतियाँ खेल का अभिन्न अंग हैं.

उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सौ प्रतिशत सही परिणाम तो हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन फुटबॉल जैसे तेज़ रफ्तार खेल में ऐसा किया जाना, खेल की लय को बिगाड़ देगा.

अगर हर कड़े निर्णय पर खेल को रोका जाता है तो बाईस खिलाड़ी और 70 हज़ार दर्शकों पर इसका ठीक असर नहीं पड़ेगा.

आज के खेलों में तेज़ी की बहुत अहमियत है और सबकुछ तुरत-फुरत में होता है. जैसे एक सैंटर फारवर्ड गोल करने से चूक सकता है, गोलकीपर एक क्रास को रोकने में असफल रह सकता है, ठीक उसी तरह से रेफ़री भी खिलाड़ियों की तरह ग़लती कर सकता है.

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