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बुधवार, 15 सितंबर, 2004 को 20:46 GMT तक के समाचार
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नज़र को लेकर बदलता नज़रिया

नेत्रहीन खिलाड़ी
नेत्रहीन खिलाड़ी विशेष फुटबॉल से खेलते हैं
भारत में दृष्टिहीनों के बीच नए खेलों को बढ़ावा देने के लिए अब उन्हें परंपरागत खेलों की बजाए फुटबाल, टेबल-टेनिस और जूडो जैसे खेल सिखाए जा रहे हैं.

अभी तक दृष्टिहीनों की पहुँच केवल एथलेटिक्स, खो-खो और कबड्डी तक ही सीमित थी, और कभी-कभार क्रिकेट खेलने का मौक़ा मिल जाता है.

अंतरराष्ट्रीय दृष्टिहीनों खेल परिषद की ओर से भारत को उपहार में मिले विशेष फुटबॉलों की मदद से देश के कई हिस्सों में नेत्रहीन खिलाडी फुटबाल खेल पा रहे हैं.

ये विशेष फुटबाल लुढकने पर आवाज़ करती है जिससे खिलाड़ी दिशा का अंदाज़ा लगा कर उस तक जा पहुँचता है.

 फुटबॉल, टेबल टेनिस और जूडो जैसे खेलों का विकास किया जा रहा है जो नेत्रहीनों की संस्थाओं की पहुँच के भीतर हैं
कैलाश चंद्र पांडे

इस खेल के नियम-कायदे भी कुछ अलग से है. पाँच खिलाडियों वाली टीम में चार खिलाडी पूरी तरह से दृष्टिहीन होते है जबकि गोलकीपर आंशिक रुप से.

इन विशेष फुटबॉलों का आयात महँगा होने के कारण इन्हें भारत में ही बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

ब्राज़ील के बाद भारत ऐसा दूसरा देश है जहाँ दृष्टिहीनों फुटबाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.

भारतीय नेत्रहीन खेल परिषद के एक अधिकारी कैलाश चंद्र पांडे का कहना है कि "भारत में सुविधाओं की कमी और आर्थिक तंगी के चलते दृष्टिहीनों में ऐसे खेलों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता जिन पर भारी ख़र्च आता हो, इसलिए फुटबॉल, टेबल टेनिस और जूडो जैसे खेलों का विकास किया जा रहा है जो दृष्टिहीनों की संस्थाओं की पहुँच के भीतर हैं."

उनका मानना है कि "नए खेलों की वजह से दृष्टिहीनों के मनोबल, सूझबूझ और शारीरिक क्षमता में बढ़ोतरी हुई है."

उत्साह

इन खेलों को लेकर दृष्टिहीनों खिलाड़ियों में काफी जोश और उत्साह है. उन्हें अपने अंधेरे जीवन में उजाला नज़र आने लगा है.

नेत्रहीनों के टेबल टेनिस
टेबल टेनिस दृष्टिहीनों के लिए नया खेल है

मशहूर फुटबाल खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया के प्रशंसक एक दृष्टिहीनों खिलाडी ताराचंद शेरपा का तो जैसे सपना ही सच हुआ है.

शेरपा कहते हैं, "पहले कुछ मुश्किल लगता था, गिरने, धक्का लगने का डर रहता था पर अब तो हिम्मत आ गई है और ऐसा लगता है कि कोई भी खेल खेला जा सकता है."

दृष्टिहीनों के फुटबाल कोच रामाश्रय राम को लगता है कि "फुटबाल ने नेत्रहीनों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए हैं और खिलाडियों का जीवन के प्रति नज़रिया ही बदल गया है."

दृष्टिहीनों के लिए टेबल-टेनिस के खेल को पहली बार विकसित करने का श्रेय नेत्रहीन खेल परिषद के अधिकारी आरएस बंसल को जाता है.

 फुटबाल ने दृष्टिहीनों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए हैं और खिलाडियों का जीवन के प्रति नज़रिया ही बदल गया है
कोच रामाश्रय राम

उन्होंने कई तरह के परिवर्तन करके इस खेल को दृष्टिहीनों के लिए उपयोगी बनाया. उनका कहना है कि "दौड़- भाग से कतराने वाले खिलाडियों को प्रोत्साहित करने के लिए ही मैंने ये खेल विकसित किया है."

इन नए खेलों को विकसित और प्रचलित करने में भारतीय दृष्टिहीनों परिषद अन्य संस्थाओं से भी माली मदद ले रही है.

दिसंबर में होने वाले राष्ट्रीय दृष्टिहीनों खेलों के दौरान इन नए खेलों को और प्रोत्साहन दिया जाएगा. इन राष्ट्रीय खेलों में अफ़ग़ानिस्तान, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेगें.

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