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ढाका में महिलाएँ फ़ुटबॉल मैदान में उतरीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की पहली महिला फ़ुटबॉल प्रतियोगिता राजधानी ढाका में शुरू हो गई है. देश की कई कट्टरपंथी इस्लामी राजनीतिक पार्टियाँ इस प्रतियोगिता का विरोध कर रही हैं. इस प्रतियोगिता की शुरुआत बिना किसी समारोह और एक ऐसे स्टेडियम में हुई जहाँ आमतौर पर फ़ुटबॉल नहीं खेला जाता. जमीयत-उल-उलेमा इस्लामी के प्रवक्ता ने महिलाओं के फ़ुटबॉल खेलने को अभद्र बताया और उन्होंने चेतावनी दी कि उनका संगठन इसके ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेगा. लेकिन खेल मंत्री फ़ज़लुर्रहमान ने प्रतियोगिता का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए अब एक नए युग की शुरुआत होगी. इनकार इस वर्ष जुलाई में इस्लामी पार्टियों के दबाव में आकर पहली महिला कुश्ती प्रतियोगिता को रद्द कर दिया गया था. बांग्लादेश फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन के प्रमुख एसए सुल्तान ने इस बात से इनकार किया है कि इस्लामी गुटों के साथ किसी तरह का समझौता हुआ है. उन्होंने बीबीसी को बताया, ‘हम फ़ीफ़ा के कुछ नियमों से बँधे हुए हैं और हम इस तरह की प्रतियोगिता को आयोजित करने के लिए मजबूर हैं.’ उन्होंने कहा कि कुछ अन्य मुस्लिम देश जैसे ईरान, पाकिस्तान, जॉर्डन औऱ क़तर महिलाओं के लिए फ़ुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित कर चुके हैं. इस प्रतियोगिता में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं. |
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