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फ़ुटबॉल के जन्म की कहानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़ुटबॉल कब और कहाँ से आया आया इसका सटीक और प्रामाणिक जवाब दे पाना संभव नहीं है. जो दस्तावेज़ अभी तक मिल सके हैं उनके आधार पर फ़ुटबॉल से मिलते-जुलते खेल की जड़ें, दो हज़ार साल से भी पहले से मिलनी शुरू होती हैं. ऐसा पता चलता है कि चीन में ईसा पूर्व दूसरी और तीसरी शताब्दी में हान वंश के शासनकाल में सेना के लोग फ़ुटबॉल की तरह का खेल खेला करते थे. इसी तरह लगभग लगभग दो हज़ार साल पहले जापान में भी इस तरह के खेल का पता चला है. यूनानी और रोमन शासकों के काल में भी फ़ुटबॉल की तरह का खेल होता था. हालाँकि तब एक-एक टीम में 27 खिलाड़ी तक हुआ करते थे. रोमन अपने साथ इस खेल को इंग्लैंड ले गए मगर ये कहना होगा कि आधुनिक फ़ुटबॉल का जन्म तभी हुआ. रोमनों ने प्रभाव बेशक डाला हो मगर आधुनिक फ़ुटबॉल का जन्मदाता ब्रिटेन को कहा जाता है. ब्रिटेन में फ़ुटबॉल इंग्लैंड में फ़ुटबॉल के बारे में एक कहानी ये भी प्रचलित है कि सबसे पहले ये खेल पूर्वी इंग्लैंड में खेला गया जहाँ स्थानीय लोगों ने लड़ाई के बाद डेनमार्क के राजकुमार के कटे सिर से फ़ुटबॉल खेला. ब्रिटिश टापू यानी इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में आठवीं से 19वीं शताब्दी तक जो खेल खेला गया उनके क़ायदे-क़ानून बड़े अलग-अलग थे. कहीं खेल में हिंसा का समावेश था तो कहीं खिलाड़ियों की संख्या बेहिसाब थी. कभी-कभी दो समुदायों, गाँवों या शहरों के बीच ही मुक़ाबला हो जाया करता था जिनमें गलियों, चौराहों, सड़कों और खेतों तक में लोग गेंद लेकर उतर जाया करते थे. तब गेंद को किसी ख़ास जगह पहुँचाना होता था और इसके लिए सैकड़ों लोग दिन-दिन भर तक दौड़-भाग करते थे. फ़ुटबॉल खेलने पर सज़ा खेल में हिंसा इस हद तक पहुँच जाया करती थी कि इस खेल पर पाबंदी तक लगाने की नौबत आ गई. 1331 में इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय ने फ़ुटबॉल पर रोक के लिए क़ानून पर मुहर लगाई तो 1424 में स्कॉटलैंड की संसद में राजा जेम्स ने फ़ुटबॉल पर पाबंदी लगाने की घोषणा की. इंग्लैंड की महारानी एलिज़बेथ प्रथम ने भी ये क़ानून बनाया कि फ़ुटबॉल खेलते पाए जाने पर एक सप्ताह की जेल होगी और चर्च में माफ़ी भी माँगनी पड़ेगी. मगर तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रिटेन में फ़ुटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता पर लगाम नहीं लगाई जा सकी. नियम
समय के साथ-साथ फ़ुटबॉल में नियम बनते गए और 1815 में इंग्लैंड के प्रतिष्ठित स्कूल, इटन कॉलेज ने खेल के कुछ क़ायदे-क़ानून बनाए जिसे दूसरे स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने भी मानना शुरू किया. इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में 1848 में फ़ुटबॉल के नियमों को संगठित किया गया जिसे अधिकतर जगहों पर मान्यता मिली और इनको कैंब्रिज नियम कहा गया. 26 अक्तूबर 1863 को लंदन के 11 क्लबों और स्कूलों ने फ़्रीमैसन्स टैवर्न में ऐतिहासिक बैठक की. इसी दिन फ़ुटबॉल एसोसिएशन का गठन हुआ. हाथ का इस्तेमाल इसके बाद फ़ुटबॉल और रग्बी के समर्थकों में इस बात पर मतभेद हुए कि खेल में हाथ का कितना इस्तेमाल किया जाए. आठ दिसंबर 1863 को फ़ुटबॉल और रग्बी संगठन औपचारिक रूप से अलग हो गए. 1869 में फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने फ़ुटबॉल में हाथ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी. 1871 में एफ़ए कप प्रतियोगिता शुरू हुई जो दुनिया की पहली फ़ुटबॉल प्रतियोगिता थी. 1872 में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल मैच खेला गया. फ़ुटबॉल का प्रसार और फ़ीफ़ा ब्रिटेन के लोगों के प्रभाव के कारण फ़ुटबॉल का प्रसार होता गया और यूरोप के नए देशों ने अपने फ़ुटबॉल संघ बनाने शुरू किए. मई 1904 में पेरिस में फ़ीफ़ा का जन्म हुआ जो वर्तमान समय में फ़ुटबॉल की सर्वोच्च संस्था है. फ़ीफ़ा यानी फ़ेडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल फ़ुटबॉल एसोसिएशन में आरंभ में केवल सात सदस्य थे मगर 1950 तक आते-आते इसके सदस्यों की संख्या बढ़कर 51 तक पहुँच गई. 2004 तक पूरी दुनिया के 204 देश फ़ीफ़ा के सदस्य बन चुके हैं. |
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